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साईं को संत बताया तो उमा पर बरसे शंकराचार्य

नई दिल्ली। साईं बाबा पर संग्राम बढ़ता ही जा रहा है। दिल्ली में साईं भक्तों ने शंकराचार्य के विरोध में सड़कों पर उतरकर कैंडल मार्च निकाला। साईं भक्त शंकराचार्य के उस बयान का विरोध कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को साईं की पूजा नहीं करनी चाहिए। उधर साईं की पूजा को पाप बता रहे शंकराचार्य के निशाने पर अब केंद्रीय मंत्री उमा भारती आ गई हैं।

उमा ने साईं पूजा का समर्थन करते हुए उन्हें संत परंपरा से जोड़ दिया जिसके बाद शंकराचार्य ने उमा को रामभक्त मानने से इनकार कर दिया। इस सिलसिले में शंकराचार्य समर्थकों ने रविवार को हरिद्वार में बैठक भी की। बैठक में संतों ने मांग की कि उमा भारती को कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए।

पहले शंकराचार्य ने साईं की पूजा पर सवाल उठाए। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने साईं की पूजा को निजी विषय बताते हुए पूजा का समर्थन किया। उमा पर पलटवार करते हुए शंकराचार्य ने उमा की रामभक्ति पर ही सवाल खड़े कर दिए। शंकराचार्य ने कहा कि उमा भारती राम भक्ति के लिए जानी जाती थी लेकिन अब लगता है कि ऐसा नहीं है।

दरअसल ये सारा विवाद शुरू हुआ शंकराचार्य के उस बयान से जिसमें उन्होंने कहा था कि साईं की पूजा करने वालों को हिंदू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए। इस बयान पर उमा भारती ने हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कह दिया कि साईं के भक्तों ने कभी मांग नहीं की कि उनको अवतार घोषित किया जाए।

शंकराचार्य को लिखी एक चिट्ठी में भी उमा ने कहा शिरडी के साईंबाबा ने कभी नहीं कहा कि मैं भगवान हूं। उनके भक्तों ने भी कभी ये मांग नहीं की कि उनको अवतार घोषित किया जाए। मेरे हिसाब से ये बहुत ही निजी विषय है। मैं स्वयं साईं बाबा को बहुत मानती हूं क्योंकि मैं सभी संत परंपराओं का सम्मान करती हूं।

शंकराचार्य साईं को लेकर अपने बयान पर अड़े हुए हैं। उमा भारती पर जमकर पलटवार भी कर रहे हैं। अब देखना ये होगा कि उमा की चिट्ठी के बाद शंकराचार्य का क्या रुख रहता है। वहीं हरिद्वार में साईं के भक्तों ने साईं की प्रतिमा के साथ गंगा में डुबकी लगाई। ये शंकराचार्य के उस बयान के विरोध में किया गया जिसमें शंकराचार्य ने साईं भक्तों को गंगा में डुबकी लगाने से मना किया था।

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