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भूस्खलन से पुणे का गांव तबाह, 150 लोग जिंदा दफन!

मुंबई। भारी बारिश और भूस्खलन ने पुणे के एक पूरे गांव को तबाह कर दिया। देखते ही देखते पुणे से 70 किमी दूर बसा मलीन गांव जमींदोज हो गया। गांव के करीब 40 से 50 घर मलबे में दब गए हैं और इनमें 150 से ज्यादा जिंदगियां दबी हैं। एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव के काम युद्ध स्तर पर कर रही है। अबतक 21 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं।

बारिश से राहत कार्य में मुश्किल

हालांकि भारी बारिश की वजह से खराब हुई सड़कों की वजह से राहत के काम में मुश्किल भी आ रही है। मंत्रालय और जिलाधिकारी कार्यायल में कंट्रोल रूम बनाया गया है। देर रात मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया।

नक्शे से गायब हुआ गांव

एक ऐसा गांव जिसमें 750 से ज्यादा लोग बसते थे। उनकी जिंदगी, उनकी खुशियां और उनके घरबार उनकी जिंदगी यहीं थी। अब बचा है तो बस कई फीट ऊंची मिट्टी, कीचड़, पत्थर और चट्टानों का मलबा। मलबे में दबे हैं कम से कम 40 घर और उनमें सांस लेते डेढ़ सौ से ज्यादा बाशिंदे। कुदरत का कुछ ऐसा ही क्रोध इस गांव पर मौत बनकर टूटा, पूरा का पूरा गांव जैसे जिंदा दफन हो गया। बारिश के बीच धरती खिसकी और ऊपर से मिट्टी का रेला गांव को मिटाते हुए चला गया। चमकते दमकते शहर पुणे से महज 70 किलोमीटर दूर मौजूद मलीन गांव जैसे नक्शे से ही गायब हो गया हो।

जिंदगी की तलाश

बुलडोजर मलबा हटा रहा है तो इंसान भी हाथों से जख्मी प्राण तलाशने में लगे हुए हैं। नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स यानि एनडीआरएफ के जवानों ने कई लोगों को जिंदा मलबे से खींच निकाला। आसपास के लोग भी जैसे देवदूत बनकर इलाके में पहुंचे। एनडीआरएफ के आईजी संदीप राय राठौर ने बताया कि हमें करीब 11 बजे खबर मिली थी। पुणे एसएसपी रूरल से पता चला था कि 150-200 लोगों के फंसे होने की आशंका है। रोड के लिए मूवमेंट आसान नहीं है। सड़क पर पानी भरा है।

बारिश अभी जारी

पुणे से सटे इस इलाके में पिछले 24 घंटे से तेज बारिश हो रही थी, बुधवार का दिन था, घड़ी ने बजाए सुबह करीब साढ़े सात बजे अचानक तेज आवाज के साथ जमीन खिसकी और गांव के ठीक पीछे मौजूद पहाड़ी से मलबा नीचे गिरने लगा। चश्मदीदों के मुताबिक मलबे का रेला सिर्फ पांच मिनट में सब कुछ मिटा गया, किसी को सोचने या भागने का मौका तक न मिला।

सैकड़ों घर तबाह

यहां की तस्वीरें बता रही हैं कि जब पहाड़ से मिट्टी, पत्थर, पेड़ों के टुकड़े और चट्टानें बरस रहीं होगी तो लोगों पर क्या बीती होगी। इन तस्वीरों में एक मंदिर और कई घर दिख रहे हैं ये पहाड़ी के तहलटी में बने हुए हैं, पहाड़ी के ढलाव पर भी कई घर बने हुए हैं, लेकिन अब न घरों हैं न मंदिर, उनका नामों निशान तक नहीं बचा, यहां मौजूद ज्यादातर घर कच्चे थे, कुछ पक्के घर पूरी तरह से खत्म होने से बच गए, चश्मीदीदों का कहना है कि पहाड़ी से गिरने वाला मलबा 15 से 20 फुट तक ऊंचा था।

राहत का काम आसान नहीं है, रुक-रुक कर बारिश हो रही हैं, मलबे पर फिसलन बनी हुई है, पहाड़ से लगातार बहती मिट्टी और भूस्खलन का खतरा बना रही है। एक गांव के मिटने की खबर पूरे देश में आग की तरह फैली, महाराष्ट्र सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक हरकत में आ गई।

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