जमाखोर आपूर्ति में गडबडी कर रहे हैं : वित्त मंत्री
नयी दिल्ली : खाद्य कीमतों में हालिया बढोतरी के लिए जमाखोरों को जिम्मेदार ठहराते हुए वित्त मंत्री अरण जेटली ने आज कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि देश में पर्याप्त खाद्य भंडार है । साथ ही उन्होंने कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का भरोसा दिया।खाद्य वस्तुओं की कीमतें उछल कर हाथ से निकल जाएं, इससे पहले इनपर लगाम लगाने को उत्सुक केंद्र सरकार ने आज यहां राज्यों के खाद्य मंत्रियों की बैठक बुलाई थी ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाने और बाजार में उपलब्धता बढाने की पहलों पर चर्चा की जा सके।
केंद्र ने पिछले कुछ दिनों में प्याज और आलू जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य तय किए हैं और इनके भंडारण के लिए सीमा तय की है। सरकार ने आज संकेत दिया कि वह आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी को गैर जमानती अपराधा बनाने पर विचार करने के लिए भी तैयार हैै।जेटली ने बैठक के बाद कहा एक चीज साफ है कि घबराने की कोई बात नहीं है। राज्य मंत्रियों से जो प्रतिकिया मिली है उसके हिसाब से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।जेटली ने कहा कि जुलाई में सामान्य तौर पर सब्जियों और दलहन की कीमत बढती है। उन्होंने कहा कि इस बार 2-3 चीजों की कीमत असामान्य रूप से बढी है लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
मानसून में देरी के कारण कीमत पर पडने वाले असर की आशंका खारिज करते हुए उन्होंने कहा बारिश बस शुरू ही हुई है, इस बार देरी हो रही है पर अभी से इसको लेकर घबराना जल्दबाजी होगी।कीमत में बढोतरी से निपटने के लिए जेटली ने कहा कि कुद राजयों ने आवश्यक जिंस अधिनियम को कठोर बनाने और जमाखोरी को गैर-जमानती अपराध घोषित करने का सुझाव दिया है।जेटली ने कहा कि सरकार और उपभोक्ता मामले का मंत्रालय जमाखोरी को गैर-जमानती अपराध घोषित किए जाने के सुझाव पर विचार करेगा।खाद्य मुद्रास्फीति मई में बढकर 9.5 प्रतिशत हो गई जबकि थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पांच महीने के उच्चतम स्तर 6.01 प्रतिशत हो गई|
प्याज और आलू की कीमतों का हवाला देते हुए जेटली ने कहा कि रिकार्ड उत्पादन हुआ और इन चीजों की कोई कमी नहीं है।मंत्री ने कहा इसलिए यह कमी की समस्या नहीं है बल्कि आपूर्ति की दिक्कत है। ये चीजें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं लेकिन जमाखोर उंची कीमत की उम्मीद में आपूर्ति बाधित कर रहे हैं।हालांकि उन्होंने कहा भारत सरकार के पास किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त खाद्य भंडार है। बारिश में कम हो या कुछ इलाकों में कम हो .. यदि ऐसी स्थिति पैदा होती है तो हम इससे निपटने के लिए तैयार हैं।कीमत पर लगाम लगाने के लिए जेटली ने कहा कि राज्यों के ज्यादातर मंत्रियों से सुझाया कि केंद्र को भंडारण सुविधा बढाने में उनकी मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कुछ राज्यों ने मूल्य स्थिरीकरण कोष का सुझाव दिया। यदि कुछ जिंसों की कीमत बढती है तो बाजार में हस्तक्षेप हो सकता है।इस बैठक में खाद्य मंत्री राम विलास पासवान और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी हिस्सा लिया।मौजूदा मूल्य वृद्धि को जमाखोरों द्वारा पैदा की गई अस्थाई स्थिति करार देते हुए पासवान ने राज्य सरकारों से कहा कि आवश्यक जिंस अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।इससे पहले बैठक को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा इस साल सामान्य से कम बारिश की खबर है। जमाखोर इसका फायदा उठा रहे हैं।उन्होंने कहा खाद्य वस्तुओं का उत्पादन पिछले साल से अधिक है और कीमत अब भी अधिक है तो इसका मतलब है कि बिचौलिए भंडार कहीं और रख रहे हैं।
जेटली ने कहा कि अच्छे काम-काज की परख यह है कि कीमत पर लगाम लगाने के लिए बिचौलिए के भंडार को कैसे बाजार में लाया जाए। उन्होंने कहा यह सबसे बडी चुनौती है।उन्होंने ने कहा कुछ चीजों की कीमत पिछले साल 70-100 रपए प्रति किलो थी। इस साल कीमत अभी भी कम है। घबराने की कोई बात नहीं।वित्त मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा कि वे समस्या का आकलन करें क्योंकि मंहगाई बढने के बाद पहल करने पर बाजार में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होती है।जेटली ने कहा केंद्र और राज्य दोनों की ओर से सहयोगपूर्ण प्रयास होनी चाहिए ताकि मंहगाई हाथ से बाहर न हो। राज्य समान रूप से चिंतित हैं और वे नहीं चाहते कि कीमत बढे।आगामी त्योहारी मौसम के दौरान मूल्य नियंत्रण के लिए जेटली ने राज्यों से आग्रह किया कि वे आपूर्ति-मांग की स्थिति का आकलन करें और आपूर्ति बढाने के लिए पहले से प्रभावी कदम उठाएं।वित्त मंत्री ने केंद्र द्वारा पिछले कुछ सप्ताह में उठाए गए कदमों का जिक/ किया जिनमें गरीबों के लिए 50 लाखटन अतिरिक्त चालव का आवंटन और प्याज एवं आलू पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाना शामिल है।जेटली ने कहा कि इराक में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ रही है और हालांकि इसमें नरमी के संकेत मिल रहे हैं।
जेटली ने कहा कि अच्छे काम-काज की परख यह है कि कीमत पर लगाम लगाने के लिए बिचौलिए के भंडार को कैसे बाजार में लाया जाए। उन्होंने कहा यह सबसे बडी चुनौती है।उन्होंने ने कहा कुछ चीजों की कीमत पिछले साल 70-100 रपए प्रति किलो थी। इस साल कीमत अभी भी कम है। घबराने की कोई बात नहीं।वित्त मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा कि वे समस्या का आकलन करें क्योंकि मंहगाई बढने के बाद पहल करने पर बाजार में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होती है।जेटली ने कहा केंद्र और राज्य दोनों की ओर से सहयोगपूर्ण प्रयास होनी चाहिए ताकि मंहगाई हाथ से बाहर न हो। राज्य समान रूप से चिंतित हैं और वे नहीं चाहते कि कीमत बढे।आगामी त्योहारी मौसम के दौरान मूल्य नियंत्रण के लिए जेटली ने राज्यों से आग्रह किया कि वे आपूर्ति-मांग की स्थिति का आकलन करें और आपूर्ति बढाने के लिए पहले से प्रभावी कदम उठाएं।वित्त मंत्री ने केंद्र द्वारा पिछले कुछ सप्ताह में उठाए गए कदमों का जिक/ किया जिनमें गरीबों के लिए 50 लाखटन अतिरिक्त चालव का आवंटन और प्याज एवं आलू पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाना शामिल है।जेटली ने कहा कि इराक में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ रही है और हालांकि इसमें नरमी के संकेत मिल रहे हैं।

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