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न्यायपालिका की स्वायत्तता में दखल न दे सरकार: सीजेआई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में वरिष्ठ एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम की अनदेखी करने पर चीफ जस्टिस आर एम लोढ़ा ने मोदी सरकार की आलोचना की है। लोढ़ा ने कहा है कि सरकार ने उन्हें जानकारी दिए बिना यह फैसला लिया।

जस्टिस लोढ़ा ने आज दिल्ली में न्यायाधीश बी एस चौहान के विदाई समारोह में कहा कि वह तीन अन्य लोगों की फाइलों को मंजूरी देने लेकिन उनसे सलाह मशवरा किए बिना सुब्रमण्यम की फाइल रोकने के मोदी सरकार के आचरण पर हैरान हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं हो सकता। अगर कोई समझौता किया गया तो वह एक दिन भी मुख्य न्यायाधीश के पद पर नहीं रहेंगे।

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि सरकार ने उनका नाम अलग करने का निर्णय उनकी जानकारी और सहमति के बिना एकतरफा लिया था। उन्होंने सुब्रमण्यम के व्यवहार पर भी नाखुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सुब्रमण्यम जानते थे कि वह देश से बाहर हैं और 28 जून को लौट रहे हैं लेकिन उन्होंने 25 जून को ही न्यायाधीश बनने के संबंध में अपनी सहमति वापस लेने का 9 पृष्ठ का पत्र उन्हें भेज दिया।

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोर्ट के चयन मंडल द्वारा भेजे गये चार नामों में से तीन का ही अनुमोदन किया था और सुब्रमण्यम का नाम अलग कर चयन मंडल के पास फिर से विचार के लिए भेज दिया था। जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि अपनी सहमति वापस लेने के सुब्रमण्यम के फैसले के बाद उनका नाम हटाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

बता दें कि विवाद के चलते सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रह्मण्यम ने जज बनने से इनकार कर दिया था। पूर्व सॉलीसिटर जनरल ने कहा था कि वो अपने ऊपर लगे आरोपों से आहत हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने जो नाम सरकार के पास भेजे थे उनमें से एक को क्लियर नहीं किया गया।

गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम दोबारा कॉलिजियिम को विचार के लिए भेजते हुए सरकार ने दूसरे तीनों नामों को जज के तौर पर नियुक्ति के लिए क्लियर कर दिया। सरकार ने जिन तीन नामों को क्लियर किया उनमें कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण मिश्रा, उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और सीनियर एडवोकेट रोहिंटन नारिमन शामिल थे।

गोपाल सुब्रह्मण्यम सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर केस में एमिकस क्यूरी थे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे।

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