जावडेकर, जे बी ने राज्य सरकार की भूमिका को बताया अनुचित
भुवनेश्वर :
प्रशासन के प्रतिंबधों के विरोध में रथयात्रा का बहिष्कार करने वाले पुरी
के शंकराचार्य पर विवाद को लेकर दो केंद्रीय मंत्री और असम के राज्यपाल ने
धार्मिक मामले में राज्य सरकार की भूमिका को खारिज कर दिया है।पुरी के
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती 29 जून को रथयात्रा में शामिल नहीं
हुए थे।असम के राज्यपाल और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री जे बी पटनायक ने
कहा, रथ खींचे जाने से पहले पुरी के शंकराचार्य के आने की पुरानी परंपरा
टूट गयी। यह स्वीकार्य नहीं है।केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश
जावडेकर ने कहा, एक धर्मनिरपेक्ष देश में सरकार को किसी समुदाय के धार्मिक
मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के
बाद केंद्रीय मंत्री ने इस विवाद पर अपनी प्रतिकिया दी।
उधर, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने पूरे मामले की जांच कराने और परंपरा तोडने के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने शंकराचार्य के साथ अब तक वार्ता नहीं की है और राज्य में विवाद गहरा गया है।पटनायक ने कहा, यह खेदजनक है कि शंकराचार्य को रथ पर चढने से रोका गया। जिस तरीके से प्रशासन ने पाबंदी वाला पत्र उन्हें लिखा, इसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को इस तरह का पत्र भेजने की जगह प्रशासन को सभी पक्षों के साथ चर्चा कर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना चाहिए।
उधर, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने पूरे मामले की जांच कराने और परंपरा तोडने के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने शंकराचार्य के साथ अब तक वार्ता नहीं की है और राज्य में विवाद गहरा गया है।पटनायक ने कहा, यह खेदजनक है कि शंकराचार्य को रथ पर चढने से रोका गया। जिस तरीके से प्रशासन ने पाबंदी वाला पत्र उन्हें लिखा, इसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को इस तरह का पत्र भेजने की जगह प्रशासन को सभी पक्षों के साथ चर्चा कर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना चाहिए।

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