सेना प्रमुख आज जाएंगे चीन, अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
नई
दिल्ली : सेना प्रमुख बिक्रम सिंह की बुधवार से चीन यात्रा शुरू हो रही है
जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा का सेना की ओर से उल्लंघन की घटनाओं से
निबटने के लिए एक नई सीमा सुरक्षा संधि और रक्षा रिश्ते सुधारने जैसे
मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। उम्मीद की जा रही है कि सिंह की वार्ता
मुख्यालय स्तर, कमांड स्तर और विवादित सीमा से लगे जमीनी स्तर पर दोनो
देशों की सेनाओं के बीच के रिश्ते मजबूत करेगी।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने बताया, अभी भारत और चीन के आदान-प्रदान और सहयोग विभिन्न स्तर पर हैं। यह दो देशों के लिए बहुत अहम हैं। लेई ने मीडिया ब्रीफिंग में सिंह की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा, जिस यात्रा की आपने जिक्र किया वह चीन और भारत के बीच सेना के स्तर पर एक अहम घटना होगी।
चीनी प्रवक्ता ने कहा, हम इस यात्रा की पूर्ण सफलता की कामना करते हैं ताकि दोनों सेनाओं के बीच परस्पर विश्वास बढ़े। दोनों तरफ से वास्तविक नियंत्रण रेखा के उल्लंघन से उभरने वाले तनाव से निबटने के लिए भारत और चीन ने पिछले साल एक सीमा सुरक्षा सहयोग संधि (बीडीसीए) पर हस्ताक्षर किए थे। अधिकारियों ने बताया कि सिंह की यात्रा का उद्देश्य बीडीसीए में शामिल किए गए अनेक उपायों को जमीनी सतह पर कार्यान्वित करना है।
भारतीय सेना प्रमुख की चार दिनों की यह चीन यात्रा नौ साल के अंतराल पर हो रही है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एनसी विज ने 2005 में चीन की यात्रा की थी जिसके बाद सैन्य रिश्तों में ठंडापन आ गया था। पिछले दो साल के दौरान राजनीतिक एवं आर्थिक रिश्तों में सुधार के बाद इसमें गति आई। इस बीच, भारतीय अधिकारियों ने बताया कि सिंह चीन के सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष जनरल फान चांग्लोंग समेत जनमुक्ति सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ वार्ता करेंगे। उल्लेखनीय है कि सिंह ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष भी हैं।
सैन्य आयोग चीन का उच्चतम सैन्य निकाय है और इसका नेतृत्व खुद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग करते हैं। जनरल फान चीनी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के संचालन की देखरेख करते हैं। भारत और चीन के बीच 4000 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। हाल में, वास्तविक नियंत्र रेखा लांघ कर भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना के प्रवेश की कई रिपोर्टे भारत से आई हैं। सेना प्रमुख कार्यकारी विदेश उप मंत्री झांग येसुइ से भी मुलाकात करेंगे और यहां नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के कैडेटों को संबोधित करेंगे। बाद में, वह शंघाई की यात्रा करेंगे और वहां एक चीनी नौसैनिक पोत का मुआइना करेंगे।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने बताया, अभी भारत और चीन के आदान-प्रदान और सहयोग विभिन्न स्तर पर हैं। यह दो देशों के लिए बहुत अहम हैं। लेई ने मीडिया ब्रीफिंग में सिंह की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा, जिस यात्रा की आपने जिक्र किया वह चीन और भारत के बीच सेना के स्तर पर एक अहम घटना होगी।
चीनी प्रवक्ता ने कहा, हम इस यात्रा की पूर्ण सफलता की कामना करते हैं ताकि दोनों सेनाओं के बीच परस्पर विश्वास बढ़े। दोनों तरफ से वास्तविक नियंत्रण रेखा के उल्लंघन से उभरने वाले तनाव से निबटने के लिए भारत और चीन ने पिछले साल एक सीमा सुरक्षा सहयोग संधि (बीडीसीए) पर हस्ताक्षर किए थे। अधिकारियों ने बताया कि सिंह की यात्रा का उद्देश्य बीडीसीए में शामिल किए गए अनेक उपायों को जमीनी सतह पर कार्यान्वित करना है।
भारतीय सेना प्रमुख की चार दिनों की यह चीन यात्रा नौ साल के अंतराल पर हो रही है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एनसी विज ने 2005 में चीन की यात्रा की थी जिसके बाद सैन्य रिश्तों में ठंडापन आ गया था। पिछले दो साल के दौरान राजनीतिक एवं आर्थिक रिश्तों में सुधार के बाद इसमें गति आई। इस बीच, भारतीय अधिकारियों ने बताया कि सिंह चीन के सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष जनरल फान चांग्लोंग समेत जनमुक्ति सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ वार्ता करेंगे। उल्लेखनीय है कि सिंह ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष भी हैं।
सैन्य आयोग चीन का उच्चतम सैन्य निकाय है और इसका नेतृत्व खुद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग करते हैं। जनरल फान चीनी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के संचालन की देखरेख करते हैं। भारत और चीन के बीच 4000 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। हाल में, वास्तविक नियंत्र रेखा लांघ कर भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना के प्रवेश की कई रिपोर्टे भारत से आई हैं। सेना प्रमुख कार्यकारी विदेश उप मंत्री झांग येसुइ से भी मुलाकात करेंगे और यहां नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के कैडेटों को संबोधित करेंगे। बाद में, वह शंघाई की यात्रा करेंगे और वहां एक चीनी नौसैनिक पोत का मुआइना करेंगे।

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