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सिंगरौली बनेगी ऊर्जा नगरी: चौहान

भोपाल : सूचना प्रौद्योगिकी ने जिंदगी को कई अर्थ में बहुत आसान कर दिया है। साइबर ट्रेजरी का ही उदाहरण लें तो इससे टेक्स जमा करना कल्पना से भी ज्यादा सरल हो गया है। कर जमा करने के लिये संबंधित दफ्तर जाकर लाइन में खड़े रहने की दिक्कत खत्म हो गयी। नगद रकम लेकर जाने से जुड़े खतरों से बचत हो जाती है। रात में या दिन में छुट्टी के दिन भी साइबर ट्रेजरी से टेक्स जमा किये जा सकते हैं। व्यापारी पहले कर जमा करने अपने कर्मचारियों को भेजते थे, जो अपनी सुविधानुसार इसे जमा करते थे, जिससे अनावश्यक देरी होती थी।

इन्हीं खूबियों के चलते मध्यप्रदेश में साइबर ट्रेजरी की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है। साल 2007 में जब यह सुविधा शुरू की गई थी, तब इसमें लोगों की रुचि कम थी। उस वर्ष महज 24 हजार 477 ट्रांजेक्शन्स के जरिये केवल 16 करोड़ की रकम साइबर ट्रेजरी के जरिये जमा हुई थी। इसकी तुलना में साल 2013-14 में 25 लाख 77 हजार 903 ट्रांजेक्शन के जरिये 14 हजार 233 करोड़ की रकम जमा हुई है।

शासकीय कर अथवा शुल्क ऑनलाइन जमा करने वालों के लिये अब साइबर ट्रेजरी की चालान संख्या तत्काल उपलब्ध होगी। अब जमा रकम की पुष्टि के लिये दो दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा दो दिन पहले ही शुरू की गई है। इस सुविधा से जमा करने वाला व्यक्ति जमा की गई राशि की कोषालयीन चालान संख्या सहित चालान घर बैठे प्रिंट कर सकेगा। प्रिंट-आउट संबंधित विभागीय अधिकारी को चालान के रूप में तत्काल पेश हो सकेगा। साथ ही जमाकर्ता को निर्धारित सेवा भी तत्काल मिल सकेगी। इस सुविधा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि साइबर ट्रेजरी से कॉमन ई-चालान जोड़ा गया है। इससे सभी विभाग की राशि ऑनलाइन/रियल टाइम जमा की जा सकती है। इस सुविधा के शुरू होने से एम.पी. ऑनलाइन के कियास्क जैसे नागरिक सुविधा केन्द्र को साइबर ट्रेजरी से जोड़ा जा सकेगा। इससे जमाकर्ता कियोस्क पर जाकर शासन को देय राशि जमा कर सकेंगे।

वर्ष 2007 में जब साइबर ट्रेजरी सुविधा शुरू की गई थी, तब इससे सिर्फ एक बेंक जुड़ा था। अब इससे 10 बेंक जुड़ गये हैं। इनमें स्टेट बेंक ऑफ इण्डिया, पंजाब नेशनल बेंक, बेंक ऑफ इण्डिया, सेंट्रल बेंक ऑफ इण्डिया, यूनियन बेंक, यूको बेंक, विजया बेंक, इलाहाबाद बेंक, एक्सिस बेंक और आईसीआईसीआई बेंक शामिल हैं।

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