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दिल्ली में सरकार का फैसला कल?

नई दिल्ली : दिल्ली में सरकार गठन के लिए भाजपा को उपराज्यपाल के न्यौते की अटकलों के बीच फैसला भाजपा के संसदीय बोर्ड में होने के संकेत मिले हैं। मंगलवाल को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में संसदीय बोर्ड की बैठक यह फैसला करेगी कि दिल्ली में सरकार बनानी चाहिए या नहीं?जानकार सूत्रों के मुताबिक भाजपा संसदीय बोर्ड दिल्ली में अपनी सरकार बनाने की मंजूरी का फैसला ले सकता हैं। इसी बैठक में संभावी मुख्यमंत्री का नाम भी तय होगा। यों यह बैठक केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद होनी हैं। बैठक हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों को पहली सूची को मंजूर करने के मकसद से बुलाई गई हैं। उसी के बाद दिल्ली के राजनैतिक हालातों पर चर्चा संभव हैं। बतौर मुख्यमंत्री आला नेताओं में जगदीश मुखी के नाम पर सहमति बनती लगती हैं। ध्यान रहे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि उपराज्यपाल से औपचारिक प्रस्ताव मिलने के बाद ही पार्टी इस सिलसिले में कोई फैसला कर सकेगी।

अभी इस बात का किसी के पास जवाब नहीं है कि भाजपा 29 विधायक की मौजूदा ताकत पर कैसे 34 विधायकों के बहुमत के आंकड़े को छू पाएगी। भाजपा में दो तरह के कयास हैं। माना जा रहा हैं कि उपराज्यपाल गुप्त मतदान से सदन का नेता चुनने का निर्देश दें। दूसरा तरीका यह हैं कि बहुमत प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान 5 से 6 विधायक सदन से गैर हाजिर रहें और भाजपा की सरकार बनने दे।उधर दिल्ली में कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा जिस तरह की कोशिशें कर रही है वे असंवैधानिक हैं और इसी के चलते आज आक्रोश रैली का आयोजन किया गया है।

कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाने की भाजपा की कोशिश पर हमला करते हुए कहा है कि यह दर्शाता है कि भाजपा नए सिरे से चुनाव कराए जाने से ‘डरी’ हुई है। कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा कि अगर संख्या पर गौर किया जाए, तो भाजपा खरीद-फरोख्त के बिना सरकार नहीं बना सकती है। उन्होंने कहा, उपराज्यपाल वही अनुशंसा करेंगे, जो गृहमंत्री कहेंगे। आखिरकार तभी वह उपराज्यपाल बने रह सकेंगे। उन्होंने गृहमंत्री से लोगों को यह बताने को कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल से इस मामले में क्या करने को कहा है।

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