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नीतीश पर बरबादी का आरोप

पटना : पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार का बदला बिहार की जनता से ले रहे हैं। 15 महीनों में बिहार को फिर पुराने दिनों में लौटा दिया गया है। अब राज्य की चर्चा लालू प्रसाद से गठबंधन, मुख्यमंत्री के हास्यास्पद बयान, बढ़ते अपराध, सामूहिक पलायन, दवा घोटाले, करोड़ों में पहुंची रंगदारी की मांग और उद्घाटन से पहले टूटने वाले पुल जैसे शर्मनाक कारणों से होती है।

नीतीश कुमार भले ही कांग्रेस और जंगलराज के खिलाफ कही गई सारी बातें भूल चुके हों, लेकिन जनता नहीं भूली है कि राबड़ी सरकार में किस तरह कांग्रेस के सभी 23 विधायक मंत्री बन गए थे।कांग्रेस भी जंगलराज के लिए बराबर की गुनहगार है। अब नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद और कांग्रेस के लिए रेड कारपेट मंत्री पद और विकास योजनाएं के लिए रेड टेप लालफीताशाही का इंतजाम कर दिया है। ऐसे में नये चुनाव से ही राजनीतिक स्थिरता और विकास का दौर लौट सकता है। आज की दुर्दशा के लिए तो नीतीश कुमार अकेले जिम्मेदार हैं।

उन्होंने लगातार तीन गलतियां कीं, जिसका परिणाम बिहार भुगत रहा है। भाजपा के लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी से नफरत के चलते नीतीश कुमार ने 2013 में भाजपा से गठबंधन तोड़ कर पहली गलती की। लोकसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफा देना उनकी दूसरी गलती थी। इस्तीफा देने की जगह उन्हें नया जनादेश लेने के लिए विधान सभा भंग करने की सिफारिश करनी चाहिए थी।पिछला जनादेश नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा-जद-यू की साझा सरकार चलाने के लिए था, लेकिन जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा कर उन्होंने तीसरी गलती की। राज्य को कमजोर सरकार के हवाले कर दिया गया।

नीतीश कुमार के इशारे पर अब राजद और कांग्रेस को सरकार में शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। अभी तक ये दल सरकार को सर्मथन देने की कीमत वसूल रहे थे, अब सरकार में शामिल होकर आतंक का राज कायम करेंगे।लोग नहीं भूले हैं कि सन 2000 में जब लालू प्रसाद की पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, तब कांग्रेस ने समर्थन दे दिया था। कांग्रेस पहले भी राज्य की बदहाली और कुशासन में राजद के साथ भागीदार रही है।

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