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डॉ. फारूख का हाथ अलगाववादियों, पत्थरबाजों के साथ- रजनीश अग्रवाल


भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि भारत के अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर तीन पीढ़ियों से सत्ता भोगने के बाद यदि डॉ. फारूख अब्दुल्ला ने ऐसा प्रश्न उठाया है जो कब का समाप्त हो चुका है तो इसे अवसरवादिता और राष्ट्र के प्रति कृतघ्नता का चरम ही कहा जायेगा। श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान उन्होंने जिस तरह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सकारात्मक पहल के विपरीत पत्थर फेंकने वालों को शाबासी और नैतिक समर्थन दिया है उससे लगता है कि अब्दुल्ला खानदान के लिए सियासी खुदगर्जी सब कुछ है। उन्हें न मुल्क की अखण्डता का गौरव है और न देश की सुरक्षा के प्रति उनकी कोई प्रतिबद्धता है। कांग्रेस का कश्मीर मामले में फारूख अब्दुल्ला के प्रति रक्षात्मक रवैये से प्रतीत होता है कि कांग्रेस देश की अखण्डता के प्रति कितनी गंभीर है ? सेना प्रमुख द्वारा कश्मीर में पत्थरबाजी करने वालों को आतंकवादी की तरह कार्यवाही करने को लेकर दिए बयान पर राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलामनवी आजाद का विरोध कांग्रेस की दोहरी मानसिकता उजागर करती है।

उन्होंने कहा कि देश के फौजी सीमा पर सुरक्षा करने के लिए जान जोखिम में डाल रहे है। आतंकवादियों से समाज और मुल्क की हिफाजत कर रहे है। भाड़े के पत्थरबाज गुमराह होकर जवानों को पत्थरबाजी करके दोहरा खतरा बढ़ाते है। ऐसे दौर में पत्थरबाजों को आजादी का सिपाही बताने की सिर्फ एक ही तुक समझ में आती है कि डॉ. फारूख अब्दुल्ला को मुल्क की नहीं चुनाव जीतने की चिंता है। कुर्सी के गुलाम अब्दुल्ला अलगाववादियों की बैसाखी पर चुनाव जीतकर मुल्क का क्या भला करेंगे यह एक जीवंत प्रश्न है। उनके इस आचरण की भरपूर निंदा की जाना चाहिए।


श्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि दरअसल कश्मीर में आतंकवाद की समस्या तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू और डॉ. फारूख अब्दुल्ला के वालिद शेख अब्दुल्ला की बदनियत का दुष्परिणाम है। संविधान के तहत शेख अब्दुल्ला उनके बेटे डॉ. फारूख अब्दुल्ला और उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके है। उन्होंने संविधान की शपथ ली। संसद में जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग और पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के संकल्प से भी वे वाकिफ है। उस परिवार से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे संकीर्ण स्वार्थ के लिए देश की सुरक्षा के विरूद्ध आतंकवाद को प्रश्रय देंगे। सबसे दुखद यह है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर के युवकों से अपील की थी कि टेरिरिज्म को छोड़कर टूरिज्म के विकास में जुटे लेकिन डॉ. फारूख अब्दुल्ला ने आतंकवाद को हवा देकर राष्ट्रद्रोह का आचरण किया है जिसे माफ नहीं किया जाना चाहिए।

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