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IAS दीपाली रस्तोगी ने सरकार को भेजा जवाब, स्वच्छता अभियान पर उठाए थे सवाल

भोपाल।राजधानी में तैनात आदिवासी कल्याण विभाग की कमिश्नर दीपाली रस्तोगी को खुले में शौच मुक्ति अभियान को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। जिस पर दीपाली रस्तोगी ने सरकार को जवाब दे दिया है। जवाब में दीपाली ने कहा है की मैंने कार्यक्रम की आलोचना नही की है और ना ही मेरी भावना गलत थी। उन्होंने ये जवाब सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा। विभाग अब जवाब का परीक्षण करके मुख्यमंत्री का रिपोर्ट देगा। इसके बाद तय किया जाएगा की रस्तोगी का लेख लोकसेवक के लिए तय आचरण संहिता के खिलाफ है या नहीं।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक रस्तोगी ने जवाब में अपने द्वारा लिखे लेख का बचाव किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने ये मानने से इनकार किया है कि केंद्र और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी स्वच्छता अभियान को लेकर उन्होंने कोई नकारात्मक पक्ष रखा है। लेख में सिर्फ उन व्यावहारिक कठिनाईओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है जो ग्रामीण क्षेत्रों में आमतौर पर सामने आती हैं।

गौरतलब है की आईएएस दीपाली रस्तोगी को ये नोटिस अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में एक लेख में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये स्वच्छता अभियान की अलोचना करने पर दिया गया था। उन्होंने अपने लेख में लिखा थ कि गोरे कहते हैं कि खुले में शौच गलत है और हम तुरंत रक्षात्मक हो जाते हैं, अपनी सैकड़ों साल की आदत को बदलने के लिए छटपटाने लगते हैं, लेकिन हम ये नहीं जानते हैं कि हम गोरे नहीं है और उनकी वॉशरूम हैबिट हमसे अलग है। दीपाली रस्तोगी ने देश में पानी की कमी पर सवाल उठाते हुए शौचालय निर्माण पर सवाल खड़ा किया है।

उन्होंने कई गांवों में पानी की किल्लत का जिक्र करते हुए कहा था कि जहां महिलाएं एक- दो घड़ा पानी मिलों दूर से लाती हैं, एेसे में शौचालय के फ्लश के लिये इतना पानी कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका यह लेख एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुआ था। उसके बाद ही उन्हें नोटिस दिये जाने की अटकलें लगने लगी थी। लेकिन मंगलवार को कैबिनेट के लिये मंत्रालय में रहने के दौरान ही मुख्यमंत्री से इस मामले में परामर्श किया गया। उसके बाद श्रीमती रस्तोगी को नोटिस जारी कर दिया गया। रस्तोगी से एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न उनके इस कृत्य को अखिल भारतीय सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाये। श्रीमती रस्तोगी इस समय आयुक्त आदिम जाति के पद पर पदस्थ हैं।

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