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स्वास्थ्य विभाग का दस्तक अभियान: 17 हजार बच्चों को पिलाई दवा

रीवा | स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15  जून से 15 जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान में तीन दिन में 17 बच्चों को दवा पिलाई गई।  बच्चों में फैलने वाली बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। जानकारों की माने तो दस्तक अभियान में सबसे ज्यादा दस्त से पीड़ित बच्चे मिले।

जिन्हें ओआरएस की पैकेट दी गई और कुछ नए बच्चे मिले जिन्हें सूची में जोड़ा जा रहा है। इस अभियान में डायरिया को भी जोड़ दिया गया है। जिस कारण अब दस्तक अभियान के माध्यम से करीब 62 हजार बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा और इसी अभियान के तहत जिले की गर्भवती महिलाओं की भी जांच होगी।   इस अभियान से बच्चों के साथ गर्भावस्था वाली महिलाओं का भी शारीरिक परीक्षण किया जाएगा। 

जानकारों की माने तो गर्भवती महिलाओं में सबस ज्यादा खून की कमी खतरनाक होती है। इसके लिए विभाग तैयारी में लगा हुआ है। वहीं बरसात के समय नमी होने के चलते बैक्टीरिया अपना पैर पसारना शुरू कर देते हैं। जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी रहती है। अक्सर इसी मौसम में बच्चों को वायरल फीवर के साथ-साथ डायरिया का भी काफी असर रहता है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग पहले से तैयारी में लग गया है। दस्तक अभियान को कारगर बनाने के लिए विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगा रखा है।

जो ग्रामीण स्तर की एक एएनएम को आठ से नौ गांव मे जाकर 0 से 5 वर्ष के बच्चों का सर्वे करना है जिसमें बच्चे का वजन लेना, कुपोषण, हीमोग्लोबिन, डायरिया के साथ बच्चों में होने वाली अन्य बीमारी की जानकारी लेना। इसके लिए विभाग द्वारा एक माह का कार्यक्रम चलाया है। दस्तक अभियान को 15 जून से  शुरू कर दिया है जो अब 15 जुलाई तक चलेगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक हजार आबादी वाले गांव में एक नर्स को एक दिन सर्वे करना है।  इसी तरह दो हजार की आबादी वाले गांव में दो दिन सर्वे करना है। इस तरह प्रत्येक नर्सों, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पूरे गांव में 0 से लेकर 5 वर्ष के बच्चों का सर्वे करना है साथ ही गर्भवती महिलाओ का भी स्वास्थ्य परीक्षण एवं जांच करनी है।  

दस्तक अभियान को 15 जून से शुरू कर दिया गया है जो 15 जुलाई तक चलेगा। अभी तक 17 हजार बच्चों को दवा पिलाई गई है। इस अभियान में सबसे ज्यादा दस्त से पीड़ित बच्चे मिले हैं जिसे ओआरएस का घोल वाली पैकेट दी जा रही है। 
डॉ. एनपी पाठक 
जिला टीकाकरण अधिकारी

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