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मध्यप्रदेश में पेट्रोलियम से 5 साल में सरकार की आय हुई डबल


भोपाल: देश भर में पेट्रेल के बढ़ों दामों से होहल्ला मचा हुआ है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव एमपी की जनता पर पड़ रहा है। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार पेट्रोल पर अन्य प्रदेशों के मुकाबले सबसे अधिक वेट वसूल रही है। यहां, एक लीटर पर पेट्रोल खरीदी पर उपभोक्ता को 20 रुपए टैक्स के रूप में चुकाना होते हैं। यही हाल किसानों का भी है, गांव में ट्रेक्टर और जेनसेट का उपयोग करने वाले किसानों पर भी दोहरी मार पड़ रहा है। किसानों को डीजल खरीदी पर प्रति लीटर 14 टैक्स भुगतान करना पड़ रहा है। ऐसे हालातों में राज्य सरकार जनता पेट्रोल की कीमतों को लगातार बढ़ाती जा रही है। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। 

इंटरनेशलन मार्केट में क्रूड आइल के दामों में भारी गिरवट चल रही है। लेकिन फिर भी देश सहित मप्र में पेट्रोल में आग लबी हुई है। मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को वाणिज्यिक कर विभाग ने आरटीआई के जवाब में बताया कि साल 2016-17 में राज्य सरकार ने 8,900 करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली पेट्रोलियम उत्पादकों से की है। जबकि  2011-12 में ये आकड़ा 4,202 करोड़ था, लेकिन पंाच सालों में ये इंकम डबल हो गई। 

वाणिज्यिक कर विभाग ने बताया कि ये इंकम प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पाद की अधिक खपत होने से नहीं डबल नहीं हुई। बल्की राज्य सरकार द्वारा वसूले जाने वाले टैक्स से हुई है। राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2011-12 में 4259167 किलो लीटर का उपयोग किया गया था लेकिन ये आकड़ा बढ़ कर 2016-17 में 5698263 पर पहुंच गया है।

आरटीआई में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि  2011-12 में राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 14 और 8 रुपए टैक्स वसूला जा रहा था लेकिन बीते पांच सालों में राज्य सरकार ने  2016-17 में इसे बढ़ाकर पेट्रोल पर 20 और डीजल पर 14 कर दिया है। नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अब पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया जाने वाला टैक्स वैल्यू का 31% और प्रति लीटर 4 रुपये है। लेकिन यह पेट्रोल पर ये 20 रुपये प्रति लीटर ज्यादा है। 

आरटीआई कार्यकर्ता गौड़ ने कहा कि जब इंटरनेशल मार्केट में कच्चा तेल की कीमत कम है तो टैक्स भी कम होना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। गौड़ ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी के दायरे में आना चाहिए। जीएसटी में आने से पेट्रोल के दामों में भारी कमी आएगी जिसका असर प्रदेश कि किसानों सहिए अन्य कारोबारों पर भी देखने को मिलेगा। 

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