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ममता बनर्जी ने तीज त्यौहारों पर पाबंदी लगाकर तुष्टीकरण को परवान चढ़ायाः मालवीय


एमपी ऑनलाइन न्यूज़ 
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता सुश्री राजो मालवीय ने कहा कि पं. बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी की इससे बड़ी सांस्कृतिक निरक्षरता क्या होगी कि उन्होंने भारतीयों के दुर्गा पूजन और दशहरा के अवसर पर जुलूस और प्रतिमा विसर्जन पर पाबंदी लगा कर तुष्टीकरण को परवान चढ़ाया है। जबकि हकीकत यह है कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक अभ्युदय के प्रतिष्ठानों में इन्हीं पर्वों ने जन-जागरण किया और जनता को दासता की जंजीरे तोड़ने, गुलामी को उखाड़ फैंकने की प्रेरणा दी। उन्हें जानना चाहिए कि बाल गंगाधर तिलक ने इसी निमित्त गणेशोत्सव को गांव-गांव,घर-घर पहुंचाया और संास्कृतिक चेतना, जन-जन में आत्मविश्वास पैदा किया। लेकिन ममता बनर्जी के लिए अल्पसंख्यकों के वोट ही उनका पहला और अंतिम लक्ष्य है। कोई भी राजनैतिक दल राष्ट्र से बड़ा नहीं होता, लेकिन सुश्री ममता बनर्जी इस हकीकत से भी वाकिफ नहीं है। तुष्टीकरण को उन्होंने जीत का हथियार बना लिया है।

उन्होंने कहा कि काशी में 1600 में रामलीला की शुरूआत की गयी थी। इसके मूल में यहीं भावना थी कि अत्याचार और दंभ के प्रतीक रावण का अन्त निश्चित है। पहले आक्रमणकारी मुगलों और बाद में 1900 में अंग्रेजों के खिलाफ रामलीला का विकास हुआ। मजे की बात यह है कि यहा रामलीला का मंचन राम वन गमन से होता है जो जारी है। श्री चित्रकूट रामलीला समिति का इतिहास 474 वर्ष पुराना है। देवी पूजन और दशहरा का पर्व इसी भावना का प्रतीक है जो जन-जन में राष्ट्रभक्ति की भावना पैदा करते है। इन्साफ का समर्थन और अन्याय अत्याचार के विरोध का संदेश देते है। आगे बढ़ने, राष्ट्र को समर्पित होने का विश्वास जगाते है।

सुश्री राजो मालवीय ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक अभ्युदय के अनुष्ठान का विरोध न तो मुगलों ने किया और न फिरंगियों ने किया लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने तीज-त्यौहारों के कर्मकांड पर पांबदी लगाकर अपनी संकुचित सियासत का सबूत दिया है जो जनता का अपमान है। अलगाववाद की चिंगारी फूंकने और परस्पर सदभाव समाप्त करने की साजिश है।

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