शारदीय नवरात्र आज से आरंभ, नौ में से सात दिन रहेंगे शुभ संयोग
भोपाल। मां दुर्गा की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र २१ सितम्बर से मनाया जाएगा। इस बार पूरे नौ दिन के नवरात्र होंगे। नौ दिन देवी के भक्त मां की आराधना व अनुष्ठान करेंगे। खास बात यह है कि नौ में से छह दिन शुभ संयोग रहेंगे। २९ सितम्बर को नवमी व ३० को दशहरा मनाया जाएगा।
पंडित आचार्य अशोक भारद्वाज ने बताया कि इस बार नवरात्र में कोई घटत-बढ़त नहीं है, जो कि शुभ संयोग हैं। नौ दिनों पर अनुष्ठान चलेंगे। इन दिनों में देवी का आराधना करने वालो के लिए विशेष फलदायी साबित होंगे। वहीं शुभ संयोग नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए अच्छे हैं। इन योगों में किए गए कार्यों की सिद्धी होती है। खरीदारी के लिहाज से भी यह दिन शुभ रहेंगे। वहीं विजयदशमी या दशहरा ३० को सर्वार्थ सिद्धी व रवि योग में मनाया जाएगा।
ये है घट स्थापना की विधि
पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं। फिर उनके ऊपर अपनी इच्छा अनुसार सोने, तांबे अथवा मिट्टी के कलश की स्थापना करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति रखें। मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दें।
मूर्ति न हो तो कलश पर स्वस्तिक बनाकर दुर्गाजी का चित्र पुस्तक तथा शालिग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु की पूजा करें। नवरात्र व्रत के आरंभ में स्वस्तिक वाचन-शांतिपाठ करके संकल्प करें और सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुण का सविधि पूजन करें। फिर मुख्य मूर्ति की पूजा करें। दुर्गादेवी की आराधना-अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेयपुराणान्तर्गत निहित श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ नौ दिनों तक प्रतिदिन करना चाहिए।
ये हैं घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
सुबह 07:00 से 08:00 तक
सुबह 10:50 से 11:55 तक
सुबह 11:55 से 12:43 तक
दोपहर 12:43 से 02:10 तक
दोपहर 02:10 से 03:20 तक
शाम 04:50 से 6:20 तक
नवरात्र स्थापना का शुभ समय
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र स्थापना प्रात: काल में ही की जाती है। २१ को सुबह ६.१८ बजे से ७.४९ बजे तक द्विस्वभाव कन्या लग्न व शुभ का चौघडिया में स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त में दोपहर ११.५६ बजे से १२.४४ बजे तक भी स्थापना का शुभ मुहूर्त है।
किस दिन कौनसा योग - तारीख योग - समय
२२ सितम्बर राज योग सुबह ६.१९ से रात १२.३८ तक
२३ सितम्बर सर्वार्थ सिद्धी व रवि योग सुबह ६.१९ से रात २.१५
२५ सितम्बर रवि व सर्वार्थ सिद्धी सुबह ४.२६ संपूर्ण दिन-रात
२६ सितम्बर रवि योग सुबह ७.०३ मिनट तक
२७ सितम्बर रवि सुबह ६ से सुबह ९.५७ तक
२९ सितम्बर रवि दोपहर ३.४८ मिनट से
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय किए गए पूजा-पाठ का अनंत गुना फल मिलता है। इन नौ दिनों में मां भगवती की आराधना की जाती हैं और उन्हें मंत्र, तंत्र तथा तपस्या के द्वारा प्रसन्न किया जाता है। नवरात्रि में कुछ लोग अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार के तंत्र अनुष्ठान भी करते हैं जो उनकी इच्छा को पूर्ण करते हैं।
पंडित आचार्य अशोक भारद्वाज ने बताया कि इस बार नवरात्र में कोई घटत-बढ़त नहीं है, जो कि शुभ संयोग हैं। नौ दिनों पर अनुष्ठान चलेंगे। इन दिनों में देवी का आराधना करने वालो के लिए विशेष फलदायी साबित होंगे। वहीं शुभ संयोग नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए अच्छे हैं। इन योगों में किए गए कार्यों की सिद्धी होती है। खरीदारी के लिहाज से भी यह दिन शुभ रहेंगे। वहीं विजयदशमी या दशहरा ३० को सर्वार्थ सिद्धी व रवि योग में मनाया जाएगा।
ये है घट स्थापना की विधि
पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं। फिर उनके ऊपर अपनी इच्छा अनुसार सोने, तांबे अथवा मिट्टी के कलश की स्थापना करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति रखें। मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दें।
मूर्ति न हो तो कलश पर स्वस्तिक बनाकर दुर्गाजी का चित्र पुस्तक तथा शालिग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु की पूजा करें। नवरात्र व्रत के आरंभ में स्वस्तिक वाचन-शांतिपाठ करके संकल्प करें और सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुण का सविधि पूजन करें। फिर मुख्य मूर्ति की पूजा करें। दुर्गादेवी की आराधना-अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेयपुराणान्तर्गत निहित श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ नौ दिनों तक प्रतिदिन करना चाहिए।
ये हैं घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
सुबह 07:00 से 08:00 तक
सुबह 10:50 से 11:55 तक
सुबह 11:55 से 12:43 तक
दोपहर 12:43 से 02:10 तक
दोपहर 02:10 से 03:20 तक
शाम 04:50 से 6:20 तक
नवरात्र स्थापना का शुभ समय
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र स्थापना प्रात: काल में ही की जाती है। २१ को सुबह ६.१८ बजे से ७.४९ बजे तक द्विस्वभाव कन्या लग्न व शुभ का चौघडिया में स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त में दोपहर ११.५६ बजे से १२.४४ बजे तक भी स्थापना का शुभ मुहूर्त है।
किस दिन कौनसा योग - तारीख योग - समय
२२ सितम्बर राज योग सुबह ६.१९ से रात १२.३८ तक
२३ सितम्बर सर्वार्थ सिद्धी व रवि योग सुबह ६.१९ से रात २.१५
२५ सितम्बर रवि व सर्वार्थ सिद्धी सुबह ४.२६ संपूर्ण दिन-रात
२६ सितम्बर रवि योग सुबह ७.०३ मिनट तक
२७ सितम्बर रवि सुबह ६ से सुबह ९.५७ तक
२९ सितम्बर रवि दोपहर ३.४८ मिनट से
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय किए गए पूजा-पाठ का अनंत गुना फल मिलता है। इन नौ दिनों में मां भगवती की आराधना की जाती हैं और उन्हें मंत्र, तंत्र तथा तपस्या के द्वारा प्रसन्न किया जाता है। नवरात्रि में कुछ लोग अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार के तंत्र अनुष्ठान भी करते हैं जो उनकी इच्छा को पूर्ण करते हैं।

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