रीवा : राज्य एवं जिला अधिवक्ता संघ आमने-सामने, राज्य परिषद से फिर निर्देश जारी
रीवा | जिला सत्र न्यायालय को इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर ले जाने का मामला दीपावली अवकाश पश्चात फिर से गरमाने लगा है। गौर करने वाली बात यह है कि हड़ताल को आमरण अनशन में तब्दील करने पर उतारू अधिवक्ता संघ और राज्य अधिवक्ता परिषद आमने-सामने आते जा रहे हैं।
राज्य परिषद ने संघ को पत्र लिखकर बुधवार से काम करने के निर्देश दिए हैं, वहीं जिला अधिवक्ता संघ ने आमरण अनशन करने का ऐलान कर दिया है। इस बीच पक्षकारों की मानसिक यंत्रणा को देखते हुए यहां की अदालतों में चल रहे प्रकरण बाइंडअप किए जाने लगे हैं। इसी तारतम्य में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेके वर्मा ने न्यायाधीशों के साथ दो बार मीटिंग की।
अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि हड़ताल खत्म नहीं हुई और अधिवक्ता पैरवी करने कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तो इसका विचाराधीन प्रकरणों पर विपरीत असर पड़ेगा। हालांकि कोर्ट के अधिकृत सूत्रों ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन डिसमिस, बाइंडअप और प्रकरणों का बाहरी न्यायालयों में स्थानांतरण जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
आज से आमरण अनशन
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा है कि अब आंदोलन के लिए जो भी कड़े कदम उठाने पड़ें उसे उठाया जाएगा। संघ के सचिव रामजी पटेल ने तो यहां तक कह दिया कि न्यायालय भवन के लिए अधिवक्ता प्राण न्योछावर तक करने को तैयार हैं। दीपावली छुट्टी के बाद मंगलवार को दोपहर से कोर्ट के गेट के सामने क्रमिक अनशन शुरू हो गया। अनशन में अधिवक्ताओं को कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सम्बोधित किया।
राज्य परिषद से फिर निर्देश जारी
मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर द्वारा अधिवक्ता संघ के आंदोलन के संबंध में फिर से निर्देश दिए गए हैं। परिषद के कार्यकारी सचिव मुकेश मिश्रा के हवाले से जारी पत्र में कहा गया है कि एक विशेष तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति 27 अक्टूबर को रीवा में पहुंच अधिवक्ताओं से विचार करेगी। इस समिति में परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश नारायण पाठक, राधेलाल गुप्ता एवं प्रबल प्रताप सिंह सोलंकी हैं। सदस्य राधेलाल गुप्ता ने 25 अक्टूबर से नियमिति न्यायालयीन कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
हम लोग विधि अनुसार काम कर रहे हैं। हड़ताल पर जाना अधिवक्ताओं का स्वयं का निर्णय है। जहां तक प्रकरणों की पैरवी का सवाल है पक्षकार चाहें तो वे स्वयं अपनी बात रख सकते हैं इसकी मनाही नहीं है।
जेके वर्मा, डीजे रीवा
राज्य परिषद ने संघ को पत्र लिखकर बुधवार से काम करने के निर्देश दिए हैं, वहीं जिला अधिवक्ता संघ ने आमरण अनशन करने का ऐलान कर दिया है। इस बीच पक्षकारों की मानसिक यंत्रणा को देखते हुए यहां की अदालतों में चल रहे प्रकरण बाइंडअप किए जाने लगे हैं। इसी तारतम्य में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेके वर्मा ने न्यायाधीशों के साथ दो बार मीटिंग की।
अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि हड़ताल खत्म नहीं हुई और अधिवक्ता पैरवी करने कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तो इसका विचाराधीन प्रकरणों पर विपरीत असर पड़ेगा। हालांकि कोर्ट के अधिकृत सूत्रों ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन डिसमिस, बाइंडअप और प्रकरणों का बाहरी न्यायालयों में स्थानांतरण जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
आज से आमरण अनशन
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा है कि अब आंदोलन के लिए जो भी कड़े कदम उठाने पड़ें उसे उठाया जाएगा। संघ के सचिव रामजी पटेल ने तो यहां तक कह दिया कि न्यायालय भवन के लिए अधिवक्ता प्राण न्योछावर तक करने को तैयार हैं। दीपावली छुट्टी के बाद मंगलवार को दोपहर से कोर्ट के गेट के सामने क्रमिक अनशन शुरू हो गया। अनशन में अधिवक्ताओं को कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सम्बोधित किया।
राज्य परिषद से फिर निर्देश जारी
मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर द्वारा अधिवक्ता संघ के आंदोलन के संबंध में फिर से निर्देश दिए गए हैं। परिषद के कार्यकारी सचिव मुकेश मिश्रा के हवाले से जारी पत्र में कहा गया है कि एक विशेष तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति 27 अक्टूबर को रीवा में पहुंच अधिवक्ताओं से विचार करेगी। इस समिति में परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश नारायण पाठक, राधेलाल गुप्ता एवं प्रबल प्रताप सिंह सोलंकी हैं। सदस्य राधेलाल गुप्ता ने 25 अक्टूबर से नियमिति न्यायालयीन कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
हम लोग विधि अनुसार काम कर रहे हैं। हड़ताल पर जाना अधिवक्ताओं का स्वयं का निर्णय है। जहां तक प्रकरणों की पैरवी का सवाल है पक्षकार चाहें तो वे स्वयं अपनी बात रख सकते हैं इसकी मनाही नहीं है।
जेके वर्मा, डीजे रीवा
सम्भार : www.rewariyasat.com
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