गुना : श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में उमड़ा जनसैलाब
राजकुमार पंत
सत्संग से ही जीवन सार्थक बनता है
गुना,ब्यूरो । एकमात्र भगवान का आश्रय ही रखना चाहिए। अन्याश्रय छुड़ाने के लिए प्रभु की शरणागति ही एकमात्र साधन है। सत्संग ही से ही जीवन सार्थक बनता है। प्रभु के अनुकूल बनकर रहना यही पुष्टि भक्ति का लक्षण है। ठाकुरजी को सुख पहुंचना ही सेवा है। शहर से 15 किमी दूर भिंडरा गांव में अहमदाबाद से पधारे प. पू. गोस्वामी की 108 श्री दर्शन कुमार जी महोदय के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ के दौरान धर्म के गूढ़ तत्व श्रवण करने हजारों वैष्णवों की भीड़ उमड़ रही है। 8 अक्टूबर से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन 14 अक्टूबर को होगा। प. पू. गोस्वामी श्रीगोवर्धन जी महोदय ने भगवान की लीलावतारों का वर्णन करते हुए श्रीमद् भागवत के तत्वज्ञान का उपदेश दिया। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टि मार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि रतनपुरा, देवपुर, तरावटा, हनुमंतपुरा, आरी, गोपालपुरा, नेगमा, ऊमरी, फतेहपुर के तहत इस कथा के मुख्य मनोरथी आरी वाले पटेल साहब श्री मांगीलाल धाकड़ हैं। ऊमरी क्षेत्र में बह रही भक्ति की गंगा के दौरान श्री गोवर्धन लीला, रास पंचाध्यायी की सरस लीलाओं का वर्णन महाराज ने किया।
सत्संग से ही जीवन सार्थक बनता है
गुना,ब्यूरो । एकमात्र भगवान का आश्रय ही रखना चाहिए। अन्याश्रय छुड़ाने के लिए प्रभु की शरणागति ही एकमात्र साधन है। सत्संग ही से ही जीवन सार्थक बनता है। प्रभु के अनुकूल बनकर रहना यही पुष्टि भक्ति का लक्षण है। ठाकुरजी को सुख पहुंचना ही सेवा है। शहर से 15 किमी दूर भिंडरा गांव में अहमदाबाद से पधारे प. पू. गोस्वामी की 108 श्री दर्शन कुमार जी महोदय के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ के दौरान धर्म के गूढ़ तत्व श्रवण करने हजारों वैष्णवों की भीड़ उमड़ रही है। 8 अक्टूबर से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन 14 अक्टूबर को होगा। प. पू. गोस्वामी श्रीगोवर्धन जी महोदय ने भगवान की लीलावतारों का वर्णन करते हुए श्रीमद् भागवत के तत्वज्ञान का उपदेश दिया। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टि मार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि रतनपुरा, देवपुर, तरावटा, हनुमंतपुरा, आरी, गोपालपुरा, नेगमा, ऊमरी, फतेहपुर के तहत इस कथा के मुख्य मनोरथी आरी वाले पटेल साहब श्री मांगीलाल धाकड़ हैं। ऊमरी क्षेत्र में बह रही भक्ति की गंगा के दौरान श्री गोवर्धन लीला, रास पंचाध्यायी की सरस लीलाओं का वर्णन महाराज ने किया।
संगठन को नई दिशा दी जाएगी
बमोरी क्षेत्र में पुष्टिमार्गीय वैष्णव के हजारों परिवार हैं। यहां पर वल्लभ कुल के आचार्यों द्वारा ग्रामीण अंचल में भक्ति का प्रचार किया जाता है। वैष्णवों को संगठित करने का प्रयास अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद मंडल द्वारा किया जा रहा है। महाराज श्री के साथ शास्त्रीय संगीतकारों की विशेष टोली क्षेत्र में संगीत की स्वर लहरियां बिखेर रही हैं। बंशी वादन, वीणा सहित अन्य वाद्ययंत्रों को सम्मिश्रण से कथा का अलौकिक आनंद का संचार हो रहा है।
बमोरी क्षेत्र में पुष्टिमार्गीय वैष्णव के हजारों परिवार हैं। यहां पर वल्लभ कुल के आचार्यों द्वारा ग्रामीण अंचल में भक्ति का प्रचार किया जाता है। वैष्णवों को संगठित करने का प्रयास अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद मंडल द्वारा किया जा रहा है। महाराज श्री के साथ शास्त्रीय संगीतकारों की विशेष टोली क्षेत्र में संगीत की स्वर लहरियां बिखेर रही हैं। बंशी वादन, वीणा सहित अन्य वाद्ययंत्रों को सम्मिश्रण से कथा का अलौकिक आनंद का संचार हो रहा है।


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