ग्वालियर के किस्मत कनेक्शन से खून के रिश्तों का हुआ मिलन
ग्वालियर : 13 का सुखलाल कल से बेसब्र था।
आंखों में बसी अपने पिता की सूरत वो कभी हकीकत में भी देख पाएगा। वो कभी
अपने घर और अपनो के बीच जा पाएगा। कुछ समय पहले तक उसके पास न तो इन सवालो
के जवाब थे और न ही ये यकीन कि बिहार में रहने वाला उसका परिवार उसे मिल
जाएगा। ग्वालियर से उसकी किस्मत कनेक्शन ऐसा हुआ कि ग्वालियर के लोगों ने
खून के रिश्तों से उसका कनेक्शन करा दिया। उसे मालूम था कि आज उसके पिता आ
रहे है। बस इसी बात की खुशी ने उसे रात भर जगाए रखा...और फिर आज सुबह जब
उसके पिता कोईले सहानी उसके सामने आए तो उन्हें देखकर वह उनसे लिपट गया।
बाप-बेटे के इस मिलन में दोनों खुशी से खूब रोए। बाद में दोनो ने एक दूसरे
के आंसू पोंछे और खुशी से खूब झूमे उठे।
सुखलाल कल अपने पिता कोईले सहानी के साथ सात साल बाद अपने परिवार के पास लौट जाएगा। इसके पहले आज सुखलाल को उनके परिजनों को सौपने के लिए चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएगी। सुखलाल के पिता के साथ बिहार पुलिस ने अपने एक कर्मचारी अनम शाह को भी भेजा है। गौरतलब है कि सुखलाल 6 साल की उम्र में घर से निकल आया और भटकता हुआ हरियाणा पहुंच गया जहां 6 साल तक बंधुआ मजदूर रहा फिर वहां से भागा और माधव अंध आश्रम पहुंच गया।
सुखलाल कल अपने पिता कोईले सहानी के साथ सात साल बाद अपने परिवार के पास लौट जाएगा। इसके पहले आज सुखलाल को उनके परिजनों को सौपने के लिए चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएगी। सुखलाल के पिता के साथ बिहार पुलिस ने अपने एक कर्मचारी अनम शाह को भी भेजा है। गौरतलब है कि सुखलाल 6 साल की उम्र में घर से निकल आया और भटकता हुआ हरियाणा पहुंच गया जहां 6 साल तक बंधुआ मजदूर रहा फिर वहां से भागा और माधव अंध आश्रम पहुंच गया।
उसका परिवार मिल गया, मैं बहुत खुश हूं
सुखलाल जब माधव बाल आश्रम में मिला था तो वह कुछ बोल पाने और समझाने की स्थिति में नही था, लेकिन मानवाता ग्रुप के फाउंडर आयुष वैद्य लगातार उसकी काउंसलिंग करते रहे। आखिरकार आयुष वैद्य को जब सुखलाल ने अपने घर के संबध में कुछ संकेत दिए तो उन्होने सोशल मीडिया व लोगों की मदद से उसके परिवार को ढूंढ़ना शुरू किया। आखिर में बिहार में समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव में उसका परिवार मिल गया। आयुष ने प्रदेश टुडे से कहा कि सुखलाल को उसका बिछुड़ा हुआ परिवार मिल गया। इससे वह आज बहुत खुश है।
सुखलाल जब माधव बाल आश्रम में मिला था तो वह कुछ बोल पाने और समझाने की स्थिति में नही था, लेकिन मानवाता ग्रुप के फाउंडर आयुष वैद्य लगातार उसकी काउंसलिंग करते रहे। आखिरकार आयुष वैद्य को जब सुखलाल ने अपने घर के संबध में कुछ संकेत दिए तो उन्होने सोशल मीडिया व लोगों की मदद से उसके परिवार को ढूंढ़ना शुरू किया। आखिर में बिहार में समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव में उसका परिवार मिल गया। आयुष ने प्रदेश टुडे से कहा कि सुखलाल को उसका बिछुड़ा हुआ परिवार मिल गया। इससे वह आज बहुत खुश है।
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