शिक्षिका ने की पांच साल के बच्चे के साथ मारपीट, थाने में मामला हुआ दर्ज
डबरा : एक शिक्षिका ने स्कूल जाने के लिए
बस में बैठ रहे एलकेजी में पढ़ने वाले 5 वर्षीय बालक को बुरी तरह से पीट
दिया। इस मारपीट से मासूम के गालों पर खरोंच आने के साथ ही उसे कानों से
सुनने में परेशानी हो रही है। मासूम के पिता को जब घटना का पता चला, तो
उन्होंने थाने पहुंचकर आरोपी शिक्षिका के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
राजेंद्र रजक का 5 वर्षीय पुत्र अंश रजक एवं 10 वर्षीय बेटी माही ग्वालियर रोड स्थित स्कूल जाने के लिए 20 नंबर की बस के अंदर बैठे, तो उस बस में उनके स्कूल की शिक्षिका साधना सहगल भी बैठी थी। जैसे ही अंश सीट पर बैठने लगा साधना सहगल ने उसका स्कूल बैग छीनकर फेंक दिया, जब इससे भी उसका दिल नही भरा, उसने बच्चे के दोनों गालों में जोरदार तमाचे जड़ दिए। जिस कारण किसी पैनी नोंकदार चीज से बच्चे के गालों पर खरोंच आने के साथ ही उसके दाहिने कान में चोट आ गई, जिस कारण अंश को सुनने में परेशानी हो रही है। जब टीचर बच्चे के साथ मारपीट कर रही थी, तभी अंश की बड़ी बहन माही ने अपने भाई को बचाने के लिए लोगोंको आवाज लगाई, तो गाड़ी के पास से गुजर रहा व्यक्ति आवाज सुनकर तुरंत बच्चे को बचाने पहुंचा। उसे आते देख मैडम ने बच्चे को छोड़ दिया, तो उक्त व्यक्ति दोनों बच्चो को गाड़ी से उतारकर वापस घर छोड़ गया। इस मारपीट से दोनों बच्चे काफी डरे हुए थे, और बच्चे को काफी चोट भी आ चुकी थी। बच्चे के पिता जो कि बाहर प्राइवेट नौकरी करते हैं, वह जब रविवार की छुट्टी के लिए घर आए, तो डरे-सहमे बच्चे व उसे लगी चोट को देखकर उसका कारण पूछा, जिस पर बड़ी बेटी माही ने पिता को सब कुछ बता दिया। घटना की जानकारी मिलते ही राजेंद्र तुरंत थाने पहुंचा और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, जिस पर पुलिस ने राजेंद्र की शिकायत पर आरोपी शिक्षिका साधना सहगल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
स्कूल की टीचर ने जिस बच्चे के साथ मारपीट की है उसकी मां भी उसी स्कूल में टीचर है, जिससे उसे डर था कि यदि वह इस घटना का विरोध करेगी, तो स्कूल प्रबंधक स्कूल से निकाल देगा, यही कारण है कि बच्चे की मां ने राजेंद्र को भी समझाने की कोशिश की, मगर वो नहीं माना।
यहां बताना गौरतलब होगा कि उक्त शिक्षिका द्वारा ऐसी करतूत कोई पहली बार नहीं की गई है, बल्कि इससे पूर्व भी आरोपी शिक्षिका साधना के खिलाफ इसी तरह का मामला थाने तक पहुंच चुका है, मगर स्कूल प्रबंधन के समझाने पर बच्चे के पेरेंट्स मान गए थे और उन्होंने राजी नामा कर लिया था। अगर पहले राजी नामा नही हुआ होता, तो शायद आज यह नौबत नहीं आई होती। वहीं इस मामले में सबसे बड़ी गलती तो स्कूल प्रबंधन की है, जो कि इतना कुछ होने के बावजूद आरोपी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाते हुए पेरेंट्स को को समझाने में लगा रहता है।
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