ज्ञान क्रांति और हरित क्रांति की राह पर चल पड़ा आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा
जैविक खेती से जुड़े चार हजार से ज्यादा किसान
दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिला अब नक्सल हिंसा और आतंक के साये से तेजी से मुक्त हो रहा है। यह जिला अब शिक्षा के जरिए ज्ञान क्रांति और जैविक खेती के जरिए हरित क्रांति के रास्ते पर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशव्यापी लोक सुराज अभियान 2018 के तहत जब इस जिले का दौरा किया, तो उन्हें वहां विकास की तेज गति से बहती बयार के बीच जिले की बदलती तस्वीर भी देखने को मिली। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आज कहा कि जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा के पास ग्राम जावंगा में राज्य सरकार द्वारा स्थापित एजुकेशन सिटी अपने जिले का और राज्य का भी नाम रौशन कर रही है। ग्लोबल आॅडिट यूनिट केपीएमजी ने इस एजुकेशन सिटी को दुनिया की सौ नवाचारी संरचनाओं में शामिल किया है।
यह विशाल शैक्षणिक परिसर एक सौ एकड़ से ज्यादा रकबे में संचालित है, जहां करीब एक सौ करोड़ रूपए की लागत से निर्मित भवनों में 20 से ज्यादा स्कूल और कॉलेज संचालित हो रहे हैं। परिसर में पूर्व प्राथमिक (यूकेजी) से लेकर आईटीआई, पॉलीटेकनिक और डिग्री कॉलेज तक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा की सुविधाएं विकसित की गई हैं। एक ही परिसर में प्राथमिक, मिडिल, हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी और कॉलेज का संचालन इस संस्था को एक नई पहचान दे रहा है। यह परिसर पांच हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलजार रहता है। स्कूली बच्चों के लिए वहां आवासीय सुविधा भी है। परिसर में विद्यार्थी हुनरमंद बनते हुए अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। दंतेवाड़ा की इस एजुकेशन सिटी परिसर का नामकरण देश के पूर्व प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य के निमार्ता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया गया है। इस परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ का पहला बाधारहित सक्षम विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है।
परिसर में नक्सल पीड़ित परिवारों के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना के तहत सीबीएसई पाठ्यक्रम का आवासीय स्कूल आस्था विद्या मंदिर के नाम से सुचारू रूप से चल रहा है। इसमें एक हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग ढाई साल पहले नौ मई 2015 को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दंतेवाड़ा की एजुकेशन सिटी का भी दौरा कर, बच्चों से मुलाकात की थी।
दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिला अब नक्सल हिंसा और आतंक के साये से तेजी से मुक्त हो रहा है। यह जिला अब शिक्षा के जरिए ज्ञान क्रांति और जैविक खेती के जरिए हरित क्रांति के रास्ते पर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशव्यापी लोक सुराज अभियान 2018 के तहत जब इस जिले का दौरा किया, तो उन्हें वहां विकास की तेज गति से बहती बयार के बीच जिले की बदलती तस्वीर भी देखने को मिली। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आज कहा कि जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा के पास ग्राम जावंगा में राज्य सरकार द्वारा स्थापित एजुकेशन सिटी अपने जिले का और राज्य का भी नाम रौशन कर रही है। ग्लोबल आॅडिट यूनिट केपीएमजी ने इस एजुकेशन सिटी को दुनिया की सौ नवाचारी संरचनाओं में शामिल किया है।
यह विशाल शैक्षणिक परिसर एक सौ एकड़ से ज्यादा रकबे में संचालित है, जहां करीब एक सौ करोड़ रूपए की लागत से निर्मित भवनों में 20 से ज्यादा स्कूल और कॉलेज संचालित हो रहे हैं। परिसर में पूर्व प्राथमिक (यूकेजी) से लेकर आईटीआई, पॉलीटेकनिक और डिग्री कॉलेज तक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा की सुविधाएं विकसित की गई हैं। एक ही परिसर में प्राथमिक, मिडिल, हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी और कॉलेज का संचालन इस संस्था को एक नई पहचान दे रहा है। यह परिसर पांच हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलजार रहता है। स्कूली बच्चों के लिए वहां आवासीय सुविधा भी है। परिसर में विद्यार्थी हुनरमंद बनते हुए अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। दंतेवाड़ा की इस एजुकेशन सिटी परिसर का नामकरण देश के पूर्व प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य के निमार्ता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया गया है। इस परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ का पहला बाधारहित सक्षम विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है।
परिसर में नक्सल पीड़ित परिवारों के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना के तहत सीबीएसई पाठ्यक्रम का आवासीय स्कूल आस्था विद्या मंदिर के नाम से सुचारू रूप से चल रहा है। इसमें एक हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग ढाई साल पहले नौ मई 2015 को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दंतेवाड़ा की एजुकेशन सिटी का भी दौरा कर, बच्चों से मुलाकात की थी।

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