कोतमा जनपद क्षेत्र में पत्थर व रेत का अवैध उत्खनन कार्य जोरो पर प्रषासनिक वसूली से प्राकृतिक सॅसाधन के दोहन की प्रतिस्पर्धा बढी
कोतमा जनपद क्षेत्र में पत्थर व रेत का अवैध उत्खनन कार्य जोरो पर
प्रषासनिक वसूली से प्राकृतिक सॅसाधन के दोहन की प्रतिस्पर्धा बढी
अनूपपुर / बिजुरी /प्रदीप मिश्रा -8770089979
जिले के अंतिम छोर पर बसे कोतमा जनपद के आदिवासी बाहुल्य नगर बिजुरी के आसपास स्थित नदी, नाले, जंगल, पथरीली भूमि, पर से सॅपदा का दोहन करना नगर व आसपास के वाहन मालिकों के लिए प्रषासनिक नाकामी व मिलीभगत के कारण एक बडा ब्यवसाय बन गया है। नगर व आसपास स्थित गाॅवों में इन दिनों सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत निर्माण कार्य जारी है जिसमें गिट्टी, बोल्डर, रेत का परिवहन वाहन मालिकों के लिए ब्यवसायिक काम है। नगर व आसपास दो से तीन बडी नदियाॅ एवं छोटे छोटे नाले हैं जॅहा पर रेत आसानी से उपलब्ध हैं। आसपास ही पत्थर के खदान है जॅहा से बडे व छोटे पत्थर की उपलब्धता रहती है। रेत व पत्थरों की उपलब्धता वाहन मालिक अपने सुविधानुसार अपने ब्यवसाय के लिए करते हैं जिसे जॅहा मौका मिला उठा लिया और गॅतब्य तक ला गिरा दिया। नगर में इस ब्यवसाय का प्रचलन इस कदर बढा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौड में छोटे से लेकर बडे वाहन मालिक भी शामिल हो चले मसलन प्रषासनिक अधिकारियों का हस्तक्षेप बढ गया और छोटे ब्याापारियों का वाहन चलाना मुष्किलों भरा हो गया है।
सरकार का नियॅत्रण नही रेत पर
जिले के कोतमा जनपद क्षेत्र के हिस्से में विभिन्न नदियाॅ केवई, कनई, व अन्य छोटे नदी नाले आते स्थित हैं जॅहा पर्याप्त मात्रा में रेत हैं। रेत वर्तमान समय में चल रहे विभिन्न काॅक्रीट निर्माण कार्यो के लिए पहली आवष्यकता हो चली है जिसका दोहन बेतरतीब तरीके से क्षेत्र में जारी है। विगत कई वर्षों से जिले के कोतमा जनपद क्षेत्र में रेत का दर निर्धारित नही किया गया है मसलन जिसे जॅहा पर मिला वहीं से वाहन में भराव कर उसे निर्धारित स्थान पर पहुॅचाने का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में वाहन मालिक तो अपना निजी लाभ अर्जित कर रहे वहीं सरकार को प्रतिवर्ष इन नदियों के खनिज का वाजिब दाम नही मिल पा रहा है।
पत्थर उत्खनन वैध व परिवहन बना अवैध
कोतमा जनपद के गाॅव पथरौडी, निगवानी,कोठी, छुल्हा, थाॅनगाॅव, डोगरियाॅ, कपिलधारा के अर्जुन घाट, परसाापानी, पडरीपानी,व आसपास ब्यापक पैमाने पर सरकार के मॅषा के विपरीत डेटोनेटर लगा बारुद लगाकर पत्थरों का उत्खनन कार्य जारी है। इस कार्य में राजस्व, खनिज, वन, पुलिस, का कोई रोक टोक नही है। खदान सरकार की लीज पर है य लीज के बाहर है। लीज की शर्तों का पालन हो रहा य नही मजदूरो व मालिक के काम का तरीका जायज है य नजायज आज तक इस बात की जाॅच करने की जहमत उठाते किसी अधिकारी का नाम चर्चा में नही आया। कोतमा जनपद के जॅगल, पहाड नदी नाले खेत हर जगह खुले तौर पर पत्थर के खदान सॅचालित हैं जॅहा से वाहन ख्निज भरकर रवानगी लेते हैं। खदान तक सब वैघ है वहीं से दस कदम दूर वाहन को पकडे जाने पर परिवहन पर्चा न होने से वाहन का खनिज पकडे गए अधिकारी के लिए अवैघ हो जाता है। प्रष्न यह है कि जिस स्थान से खनिज का परिवहन किया जा रहा था उस पर सॅबधित अधिकारी कार्यवाही क्यों नही करता। वाहन व वाहन मालिक पर ही अवैध परिवहन का ठीकरा क्यों फोड दिया जाता है।
क्रेषर सॅचालको के भण्डारण पर कार्यवाही क्यों नही..
जनपद के विभिन्न गाॅवों के पहुॅच मार्ग में एवॅ राष्ट्रीय मार्ग के किनारे कई क्रेषर सॅचालित हैं जॅहा पर क्षेत्र भर के पत्थर खदानों से आये बडे पत्थरों का सॅग्रहण कर लिया जाता है। पत्थर सॅग्रहण के इस प्रतिस्पर्घा में दिन रात पत्थरों का उत्खनन दोहन का कार्य जारी है। प्रष्न यह है कि क्रेषर सॅचालक अवैध पत्थरों का सॅग्रहण सरकार की मॅशा के विपरीत, पर्यावरण के को ताक में रख कर उसके स्वारुप में परिवर्तन कर उससे निजी लाभ कमा रहे हैं तथा अपने क्रेशर से बिना किसी वैध परिवहन पर्ची बिक्रय करने का काम कर रहे है बावजूद इसके वाहन पकडे जाने पर इन पर कोई कार्यवाही नही की जाती है। प्रश्न यह है कि जब परिवहन कर्ता गिट्टी परिवहन का दोषी बिना परिवहन पास के माना जाता है तो बिक्री करने वाला क्रेशर मालिक क्यों नही।
हर अधिकारी तीरंदाज पर वाहन के लिए
मिली जानकारी अनुसार खदान व क्रेषर से वाहन में गिट्टी पत्थर लेकर जाना तब वाहन मालिकों के लिए मुसीबत भरा हो जाता है उसे पकडकर परिवहन पर्चा की माॅग की जाती है। तथा पर्चा न होने पर उसका चालानी कार्यवाही कर दी जाती है। बताया जाता है राजस्व के पटवारी से लेकर एस डी एम, वन विभाग के फारेस्टर से लेकर रेंजर, पुलिस के सिपाही से लेकर नगर निरीक्षक, सभी रेत पत्थर परिवहन पर आये दिन निषाना साघ रहे हैं इन सभी का एक टारगेट वाहन पकडो कम से कम दस हजार लो न मिले तो कार्यवाही अन्यथा चलता बने। वसूली का यह दौर लगातार क्षेत्र में जारी है जिले के हर आला अधिकारी इस ब्यवस्था से वाकिफ है उन्हे पता है कि विना वैधता के रेत पत्थरों का उत्खनन, भण्डारण का कार्य जारी बावजूद इस पर कार्यवाही न कर हर किसी को तीरंदाज बना दिया गया है मसलन क्षेत्र में परिवहन के साथ लूट का धॅधा पनप रहा है।
बहरहाल कोतमा जनपद में प्राकृतिक सॅपदा का दोहन चरम सीमा पर है जिसका ब्यवसायिक लाभ लेने हर कोई आमादा है। निजी लाभ की प्रतिस्पर्घा से प्राकृतिक सॅपदा का दोहन निजी हाथों में अच्छा होता सरकार इसे अपने हाथ में लेकर आसानी से आम जनता तक देने का काम करत तथा पनप रहा अवैधानिक कारोबार व वसूली पर रोक लग पाती।

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