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कांग्रेस सन्यासी पार्टी नहीं: जयराम

भोपाल। भूमि अधिग्रहण कानून को सरकार ने चुनावी फायदे के लिए नहीं बनाया पर कांग्रेस संन्यासी पार्टी भी नहीं है कि चुनाव में इसका लाभ न ले। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को ये बात कही। पीसीसी में पत्रकारों के साथ बातचीत में जयराम ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में राज्य सरकारों और बिल्डरों की मनमानी अब नहीं चल पाएगी। ऐसा नहीं होगा कि सार्वजनिक हित में जमीन अधिगृहित की और मॉल बनाने बिल्डर को दे दी ।
ब्यूरोक्रेसी को क्लीनचिट :उन्होंने साफ कहा कि ब्यूरोकेसी अधिग्रहण के मामलों में सरकार की मंशा पर काम करती है। यही वजह है कि नए कानून को किसान, आदिवासी, दलित और मजदूर हितैषी बनाया गया है। रमेश ने कानून को चुनावी करार दिए जाने पर दो टूक कहा कि कांग्रेस सन्यासी संगठन नहीं राजनीतिक दल है। आने वाले चुनावों में जरूर प्रचार किया जाएगा।
80 फीसद सहमति जरूरी :निजी कंपनियां, जब तक 80 फीसद किसानों की लिखित अनुमति हासिल नहीं कर लेंगी तब तक अधिग्रहण नहीं कर पाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में उस इलाके में पिछले तीन साल की सेल डीड की सर्वाधिक ऊंची दर पर चार गुना दाम बतौर मुआवजा दिया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में यह दोगुना होगा। इसके साथ ही प्रभावितों का पुनर्वासन और पुन‌र्व्यवस्थापन भी करना होगा। कानून में पहली बार भूमिहीन, खेतीहर मजदूर और आसप़़डोस में काम-धंधे करने वालों को मुआवजा दिया जाएगा। सार्वजनिक उपयोग के लिए अधिग्रहित भूमि का उपयोग सरकार किसी ओर मद में नहीं कर सकेगी। अधिग्रहण के बाद भूमि का पांच साल तक उपयोग नहीं करने पर वह वापस हो जाएगी। भूमि वापस लौटाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। आदिवासी इलाकों में ग्रामसभा की अनुमति के बिना भू-अर्जन नहीं होगा।
पुराने मामलों में भी नया मुआवजा : केन्द्रीय मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कानून भूतलक्षी प्रभाव से उस स्थिति में लागू होंगे जहां पुराने कानून के हिसाब से मुआवजे की घोषणा न हुई हो, भूमि पर कब्जा न हुआ हो या पांच साल पुराने अधिग्रहण के प्रकरण में बहुमत से किसानों ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया हो। निजी भूमि खरीदी पर खरीदार को पुनर्वासन और पुन‌र्व्यवस्थापन का इंतजाम करना होगा।
सुषमा का सुझाव माना : नेता प्रतिपक्ष लोकसभा सुषमा स्वराज के सुझाव को भी कानून में स्थान दिया गया है। इसके तहत राज्य भूमि को लीज पर देने के नियम बनाएंगी।
आरटीआई गले का फंदा : रमेश ने दावा किया कि यूपीए वन और टू सरकार ने आम आदमी को कई कानूनी अधिकार देने की दिशा में कदम आगे ब़़ढाए हैं। आरटीआई, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, वन अधिकार , खाद्यसुरक्षा , भूमि अधिग्रहण कानून शामिल हैं। हालांकि, सूचना का अधिकार कानून हमारे ही खिलाफ होने लगा है। यह गले की फांस बन रहा है। इसके बावजूद हमारा मानना है कि सूचना हासिल करना जनता का अधिकार है।
शिवराज को भी तवज्जो : केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अफसरों ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति उठाई थी। अब सिंचाई परियोजना के प्रकरण में भूमि के बदले भूमि यदि संभव हो तभी दी जाएगी। लेकिन आदिवासी और दलितों के मामलों में भूमि के बदले भूमि देनी प़डेगी। मुआवजा भी कैश में दिया जाएगा। साथ ही सिंचाई परियोजना में पर्यावरण स्वीकृति हो जाने के बाद सोशल ऑडिट की जरूरत नहीं होगी।

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