पाक तालिबान ने किया हथियार डालने से इंकार
इस्लामाबाद
: गैरकानूनी संगठन पाकिस्तानी तालिबान ने हथियार डालने और देश के संविधान
को स्वीकार करने की प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पेशकश से आज इनकार कर
दिया।मीडिया में आयी खबर के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी)
ने कहा कि शरीफ के पास वार्ता करने का कोई अधिकार नहीं है। उसने कबाइली
इलाकों से सेना हटाने, उसके कैदियों को रिहा करने और अमेरिकी ड्रोन हमलों
पर रोक लगाने की अपनी मांग दोहराई।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता शहिदुल्ला शाहिद ने ‘न्यूजवीक’ को दिए गए साक्षात्कार में कहा, ‘हमने पहले ही अपनी चिंताएं बता दी हैं। सरकार के पास वार्ता का कोई अधिकार नहीं है। अधिकार या तो सेना के पास है या हमारे पास।’ उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी प्रकार से यह साबित करने के लिए कदम उठाए कि उसके पास वार्ता का अधिकार है तो संगठन बातचीत शुरू करने पर विचार करेगा।
शाहिद ने कहा, ‘नवाज शरीफ ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जब वह पाकिस्तान में थे तब कुछ और कह रहे थे और अब अमेरिका जाने के बाद वह वार्ता की पूर्व शर्तों के बारे में बात कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वह (शरीफ) हथियार डालने और संविधान को स्वीकार करने के बारे में बात कर रहे हैं। यदि हम हथियार डालने और संविधान को स्वीकार करने के इच्छुक होते तो फिर किसी प्रकार की वार्ता की आवश्यकता ही नहीं होती।’ वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए गए साक्षात्कार में शरीफ ने कहा कि तालिबान को उनकी सरकार के साथ वार्ता शुरू करने से पहले हथियार डालने होंगे और संविधान को स्वीकार करना होगा।
शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ड्रोन हमलों की बढ़ती संख्या का मुद्दा उठाए जाने के संबंध में शाहिद ने कहा, ‘यदि उनके पास अधिकार होता तो वह बलपूर्वक ड्रोन हमलों को रोक सकते थे। इन हमलों को अनुरोध करके नहीं रोका जा सकता। अभी भी देश के भीतर हमले कैसे हो रहे हैं?’ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान द्वारा वार्ता के लिए पाकिस्तान में तालिबान का कार्यालय खोलने की सलाह दिए जाने के संबंध में पूछने पर शाहिद ने कहा, ‘इमरान खान के पास अधिकार नहीं हैं। उनकी सरकार सिर्फ खबर-पख्तूनख्वा प्रांत में है। यदि इमरान खान ने इसे पूरी इमानदारी से कहा है तो, हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह उन्हें रास्ता दिखाता रहे।यह पूछने पर कि क्या प्रतिबंधित संगठन सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे खिलाफ अभियान पिछले दस वर्ष से चल रहा है। हम इसके आदि हो चुके हैं। हम तो इसका स्वागत भी करते हैं।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता शहिदुल्ला शाहिद ने ‘न्यूजवीक’ को दिए गए साक्षात्कार में कहा, ‘हमने पहले ही अपनी चिंताएं बता दी हैं। सरकार के पास वार्ता का कोई अधिकार नहीं है। अधिकार या तो सेना के पास है या हमारे पास।’ उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी प्रकार से यह साबित करने के लिए कदम उठाए कि उसके पास वार्ता का अधिकार है तो संगठन बातचीत शुरू करने पर विचार करेगा।
शाहिद ने कहा, ‘नवाज शरीफ ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जब वह पाकिस्तान में थे तब कुछ और कह रहे थे और अब अमेरिका जाने के बाद वह वार्ता की पूर्व शर्तों के बारे में बात कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वह (शरीफ) हथियार डालने और संविधान को स्वीकार करने के बारे में बात कर रहे हैं। यदि हम हथियार डालने और संविधान को स्वीकार करने के इच्छुक होते तो फिर किसी प्रकार की वार्ता की आवश्यकता ही नहीं होती।’ वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए गए साक्षात्कार में शरीफ ने कहा कि तालिबान को उनकी सरकार के साथ वार्ता शुरू करने से पहले हथियार डालने होंगे और संविधान को स्वीकार करना होगा।
शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ड्रोन हमलों की बढ़ती संख्या का मुद्दा उठाए जाने के संबंध में शाहिद ने कहा, ‘यदि उनके पास अधिकार होता तो वह बलपूर्वक ड्रोन हमलों को रोक सकते थे। इन हमलों को अनुरोध करके नहीं रोका जा सकता। अभी भी देश के भीतर हमले कैसे हो रहे हैं?’ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान द्वारा वार्ता के लिए पाकिस्तान में तालिबान का कार्यालय खोलने की सलाह दिए जाने के संबंध में पूछने पर शाहिद ने कहा, ‘इमरान खान के पास अधिकार नहीं हैं। उनकी सरकार सिर्फ खबर-पख्तूनख्वा प्रांत में है। यदि इमरान खान ने इसे पूरी इमानदारी से कहा है तो, हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह उन्हें रास्ता दिखाता रहे।यह पूछने पर कि क्या प्रतिबंधित संगठन सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे खिलाफ अभियान पिछले दस वर्ष से चल रहा है। हम इसके आदि हो चुके हैं। हम तो इसका स्वागत भी करते हैं।

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