रांची की CBI कोर्ट पहुंचे लालू यादव
रांची । चारा घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव दोषी हैं
या नहीं, ये आज तय हो जाएगा। आज रांची की कोर्ट चारा घोटाले के आरोपी लालू
यादव समेत बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और सांसद जगदीश
शर्मा समेत कई हाई प्रोफाइल लोगों पर फैसला सुनाएगी। इन सभी पर 37 करोड़ 68
लाख रुपए के चारा घोटाले का आरोप है। दागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश के
खिलाफ बने माहौल के बीच लालू के इस केस पर पूरे देश की नजर है। फैसले के
मद्देनजर बिहार में अलर्ट जारी किया गया है ताकि फैसले के बाद उनके समर्थक
किसी तरह का हंगामा न कर सकें।
37 करोड़ रुपए निकालने का आरोप
चर्चित चारा घोटाले में 17 साल की लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सीबीआई की विशेष अदालत आरजेडी प्रमुख लालू यादव पर अपना फैसला सुनाने जा रही है। लालू यादव पर चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37 करोड़ 68 लाख रुपए निकालने का आरोप है। इस मामले में सीबीआई ने उनके खिलाफ 19 मार्च 1996 को एफआईआर दर्ज की थी। इसी मामले में लालू यादव को 30 जुलाई 1997 को गिरफ्तार किया गया था। करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद लालू दिसंबर में जेल से बाहर आ पाए थे।
1996 का मामला
लेकिन इस बार संकट बड़ा हो सकता है। लालू की तरफ से 16 दिन तक बहस के बाद 17 सितंबर को कोर्ट ने अपना फैसला 30 तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ये तय करेगी कि लालू फिर जेल जाएंगे या फिर उन्हें इस मामले में बरी कर दिया जाएगा। लालू यादव के वकील चितरंजन सिन्हा का कहना है कि उन्नीस सौ छियानवे में इस मामले को सीबीआई को दिया गया था। सीबीआई ने कहा की इसमें ये लोग संलिप्त हैं। अब फैसला आने वाला है।
7 साल की हो सकती है सजा
दागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश के खिलाफ देश में बने माहौल के बीच लालू के इस केस पर सबका ध्यान है। अगर लालू दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अगर उनकी सजा 2 साल से ज्यादा की हुई तो तुरंत ही संसद की सदस्यता खारिज हो जाएगी। सजा काटने के लिए बाद भी अगले 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यानि 30 सितंबर का फैसला लालू यादव की सियासी पारी पर लंबा ब्रेक लगा सकता है। एक बार जेल जाने के बाद पार्टी और बिहार की जमीन पर उनकी रही-सही पकड़ भी कमजोर होनी तय है। मुकदमा करने वाले राजीव रंजन सिंह ने बताया कि जब यह सामने आया था कि इस तरह का घोटाला हो रहा है। जिसको लेकर हम लोगो ने पीआईएल किया था अब सुना है फैसला आने वाला है।
इस केस में बरी होने पर भी राहत नहीं
चाईबासा केस में लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा पर भी घोटाले में शामिल रहने का आरोप है। वैसे इस केस में अगर लालू बरी हो भी जाते हैं तो भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होने वालीं। चाईबासा केस के अलावा लालू पर चारा घोटाले के दौरान रांची के डोरंडा से 184 करोड़ की अवैध निकासी, दुमका कोषागार से 3.47 करोड़ की अवैध निकासी, देवघर कोषागार से 97 लाख की अवैध निकासी के मामले चल रहे हैं। मुकदमा करने वाले सरयु राय ने बताया कि यह घोटाला पहले से चला आ रहा था। लेकिन लालू के सत्ता में आते ही इसका पैमाना और बढ़ गया।
लालू ने राबड़ी को बना दिया था सीएम
नब्बे के दशक में चारा घोटाला तब सुर्खियों में आया जब बिहार के पशुपालन विभाग में जानवरों के लिए चारे की खरीद और ढुलाई में तमाम गड़बड़ियां पाई गईं। जांच में ये तक सामने आया कि जानवरों के चारे की ढुलाई के लिए कागजों पर स्कूटर और मोटरसाइकिल तक का इस्तेमाल दिखाया गया। बवाल मचा तो लालू की गिरफ्तारी भी हुई। उस वक्त अपना दबदबा कायम रखने के लिए लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था।
बेहद कम पढ़ी-लिखी राबड़ी का मुख्यमंत्री बनना उस समय बहुतों को अखरा। लेकिन लालू अपनी जिद पर अड़े रहे। कहते हैं खुद राबड़ी भी सीएम बनने के लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन लालू ने उन्हें सीएम बनाकर जेल से ही बिहार की सत्ता पर राज किया। अब 17 साल बाद इस केस में फैसले की घड़ी आई है। 17 साल पहले सुर्खियो में आये चारा घोटाले में तब पचास से भी ज्यादा लोगों का नाम सामने आया था। जिसमें किसी की मौत हो गयी तो कुछ लोग बरी भी हो गये। लेकिन इस चारा घोटाले के आरोप में राजनेता बचते रहे।
37 करोड़ रुपए निकालने का आरोप
चर्चित चारा घोटाले में 17 साल की लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सीबीआई की विशेष अदालत आरजेडी प्रमुख लालू यादव पर अपना फैसला सुनाने जा रही है। लालू यादव पर चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37 करोड़ 68 लाख रुपए निकालने का आरोप है। इस मामले में सीबीआई ने उनके खिलाफ 19 मार्च 1996 को एफआईआर दर्ज की थी। इसी मामले में लालू यादव को 30 जुलाई 1997 को गिरफ्तार किया गया था। करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद लालू दिसंबर में जेल से बाहर आ पाए थे।
1996 का मामला
लेकिन इस बार संकट बड़ा हो सकता है। लालू की तरफ से 16 दिन तक बहस के बाद 17 सितंबर को कोर्ट ने अपना फैसला 30 तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ये तय करेगी कि लालू फिर जेल जाएंगे या फिर उन्हें इस मामले में बरी कर दिया जाएगा। लालू यादव के वकील चितरंजन सिन्हा का कहना है कि उन्नीस सौ छियानवे में इस मामले को सीबीआई को दिया गया था। सीबीआई ने कहा की इसमें ये लोग संलिप्त हैं। अब फैसला आने वाला है।
7 साल की हो सकती है सजा
दागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश के खिलाफ देश में बने माहौल के बीच लालू के इस केस पर सबका ध्यान है। अगर लालू दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अगर उनकी सजा 2 साल से ज्यादा की हुई तो तुरंत ही संसद की सदस्यता खारिज हो जाएगी। सजा काटने के लिए बाद भी अगले 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यानि 30 सितंबर का फैसला लालू यादव की सियासी पारी पर लंबा ब्रेक लगा सकता है। एक बार जेल जाने के बाद पार्टी और बिहार की जमीन पर उनकी रही-सही पकड़ भी कमजोर होनी तय है। मुकदमा करने वाले राजीव रंजन सिंह ने बताया कि जब यह सामने आया था कि इस तरह का घोटाला हो रहा है। जिसको लेकर हम लोगो ने पीआईएल किया था अब सुना है फैसला आने वाला है।
इस केस में बरी होने पर भी राहत नहीं
चाईबासा केस में लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा पर भी घोटाले में शामिल रहने का आरोप है। वैसे इस केस में अगर लालू बरी हो भी जाते हैं तो भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होने वालीं। चाईबासा केस के अलावा लालू पर चारा घोटाले के दौरान रांची के डोरंडा से 184 करोड़ की अवैध निकासी, दुमका कोषागार से 3.47 करोड़ की अवैध निकासी, देवघर कोषागार से 97 लाख की अवैध निकासी के मामले चल रहे हैं। मुकदमा करने वाले सरयु राय ने बताया कि यह घोटाला पहले से चला आ रहा था। लेकिन लालू के सत्ता में आते ही इसका पैमाना और बढ़ गया।
लालू ने राबड़ी को बना दिया था सीएम
नब्बे के दशक में चारा घोटाला तब सुर्खियों में आया जब बिहार के पशुपालन विभाग में जानवरों के लिए चारे की खरीद और ढुलाई में तमाम गड़बड़ियां पाई गईं। जांच में ये तक सामने आया कि जानवरों के चारे की ढुलाई के लिए कागजों पर स्कूटर और मोटरसाइकिल तक का इस्तेमाल दिखाया गया। बवाल मचा तो लालू की गिरफ्तारी भी हुई। उस वक्त अपना दबदबा कायम रखने के लिए लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था।
बेहद कम पढ़ी-लिखी राबड़ी का मुख्यमंत्री बनना उस समय बहुतों को अखरा। लेकिन लालू अपनी जिद पर अड़े रहे। कहते हैं खुद राबड़ी भी सीएम बनने के लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन लालू ने उन्हें सीएम बनाकर जेल से ही बिहार की सत्ता पर राज किया। अब 17 साल बाद इस केस में फैसले की घड़ी आई है। 17 साल पहले सुर्खियो में आये चारा घोटाले में तब पचास से भी ज्यादा लोगों का नाम सामने आया था। जिसमें किसी की मौत हो गयी तो कुछ लोग बरी भी हो गये। लेकिन इस चारा घोटाले के आरोप में राजनेता बचते रहे।

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