लालू ने ही नहीं नीतीश ने भी खाया चारा
पटना | चारा घोटाला मामले में बिहार के बड़े राजनीतिज्ञों में महज राजद
सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ही शामिल
नहीं थे।इसमें बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के वरिष्ठ
नेता शिवानंद तिवारी को भी हिस्सा मिला था। यह दावा भाजपा नेता सुशील मोदी
ने घोटाले के मास्टर माइंड रहे श्याम बिहारी सिन्हा के इकबालिया बयान के
आधार पर किया है। मोदी ने रविवार को एक के बाद एक चार ट्वीट के अलावा
सिन्हा के इकबालिया बयान के कुछ हिस्से को साझा किया।
भाजपा नेता ने दावा किया है कि घोटाले में नीतीश को एक करोड़ तो तिवारी को 40 लाख रुपए दिए गए। नीतीश को यह रकम वर्ष 1995 में तब पहुंचाई गई जब वह समता पार्टी के बड़े नेता थे।दरअसल भाजपा इस मामले में पहले ही उलझ चुकी राजद और कांग्रेस के बाद अब जदयू को लपेट कर राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश में है। इस मामले में रांची हाईकोर्ट ने पहले ही सीबीआई को 22 नवंबर तक हलफनामा दायर कर स्थिति साफ करने के लिए कहा है।
दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और कई वरिष्ठ नेताओं को मिली सजा से चारा घोटाले पर गरमाई बिहार की सियासत को भाजपा ने और हवा दे दी है। मोदी ने सिन्हा के इकबालिया बयान का जो हिस्सा साझा किया है, उसमें नीतीश को एक करोड़ और शिवानंद को 40 लाख रुपये दिया जाना स्वीकार किया गया है। हालांकि इकबालिया बयान देने वाले सिन्हा का निधन हो चुका है। बयान में सिन्हा ने सतर्कता अधिकारी उमेश प्रसाद सिंह के जरिए नीतीश को एक करोड़ रुपये देने की बात की है। बयान में कहा गया है कि उमेश ने मार्च 1995 में उनसे संपर्क किया और नीतीश के एक करोड़ रुपया मांगने की बात बताई।
चूंकि नीतीश कुमार समता पार्टी के वरिष्ठ नेता के तौर पर उभर रहे थे, इसलिए रांची लौटने के बाद हुई बैठक में यह रकम देने पर सहमति बनी। बकौल सिन्हा इसके बाद वह वापस दिल्ली आए और उमेश सिंह को एक करोड़ रुपये दिए। नीतीश ने टेलीफोन पर उमेश सिंह के आने और उनसे मिलने की पुष्टि की थी। इसी इकबालिया बयान में शिवानंद को 40 लाख रुपये देने का जिक्र किया गया है। बयान में कहा गया है कि तिवारी ने करोलबाग के खिला होटल में 50 लाख रुपये मांगे थे। बाद में त्रिपुरारी मोहन प्रसाद ने 40 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। इसे प्रसाद ने बाद में कंफर्म किया कि उसने शिवानंद को देने के लिए 30 से 35 लाख रुपये उमेश प्रसाद सिंह को दिए थे।
भाजपा नेता ने दावा किया है कि घोटाले में नीतीश को एक करोड़ तो तिवारी को 40 लाख रुपए दिए गए। नीतीश को यह रकम वर्ष 1995 में तब पहुंचाई गई जब वह समता पार्टी के बड़े नेता थे।दरअसल भाजपा इस मामले में पहले ही उलझ चुकी राजद और कांग्रेस के बाद अब जदयू को लपेट कर राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश में है। इस मामले में रांची हाईकोर्ट ने पहले ही सीबीआई को 22 नवंबर तक हलफनामा दायर कर स्थिति साफ करने के लिए कहा है।
दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और कई वरिष्ठ नेताओं को मिली सजा से चारा घोटाले पर गरमाई बिहार की सियासत को भाजपा ने और हवा दे दी है। मोदी ने सिन्हा के इकबालिया बयान का जो हिस्सा साझा किया है, उसमें नीतीश को एक करोड़ और शिवानंद को 40 लाख रुपये दिया जाना स्वीकार किया गया है। हालांकि इकबालिया बयान देने वाले सिन्हा का निधन हो चुका है। बयान में सिन्हा ने सतर्कता अधिकारी उमेश प्रसाद सिंह के जरिए नीतीश को एक करोड़ रुपये देने की बात की है। बयान में कहा गया है कि उमेश ने मार्च 1995 में उनसे संपर्क किया और नीतीश के एक करोड़ रुपया मांगने की बात बताई।
चूंकि नीतीश कुमार समता पार्टी के वरिष्ठ नेता के तौर पर उभर रहे थे, इसलिए रांची लौटने के बाद हुई बैठक में यह रकम देने पर सहमति बनी। बकौल सिन्हा इसके बाद वह वापस दिल्ली आए और उमेश सिंह को एक करोड़ रुपये दिए। नीतीश ने टेलीफोन पर उमेश सिंह के आने और उनसे मिलने की पुष्टि की थी। इसी इकबालिया बयान में शिवानंद को 40 लाख रुपये देने का जिक्र किया गया है। बयान में कहा गया है कि तिवारी ने करोलबाग के खिला होटल में 50 लाख रुपये मांगे थे। बाद में त्रिपुरारी मोहन प्रसाद ने 40 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। इसे प्रसाद ने बाद में कंफर्म किया कि उसने शिवानंद को देने के लिए 30 से 35 लाख रुपये उमेश प्रसाद सिंह को दिए थे।

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