जमीनी हकीकत से साबित है कि भाजपा है देश की सबसे बड़ी दलित विरोधी पार्टी : अरूण यादव
भोपाल । प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष एवं सांसद अरूण यादव ने भारतीय जनता
पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सूरजभान
कटारिया द्वारा कल भोपाल की एक पार्टी बैठक में केवल भाजपा को दलित हितैषी
पार्टी बताये जाने पर पलटवार करते हुए कहा है कि कटारियाजी को शायद म.प्र.
सहित देश के भाजपा शासित राज्यों की ज़मीनी हक़ीक़त मालूम नहीं है। इसी कारण
वे दलितों के साथ भाजपा के रिश्ते को लेकर बढ़-चढ़कर बातें कर रहे हैं। जब वे
ज़मीनी सच्चाई को परख लेंगे तो ऐसे निराधार दावे करने की कभी चेष्टा नहीं
करेंगे। आपने कहा है कि दिल्ली के भाजपा नेता ने यह समझाने की कोशिश की है
कि भाजपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो दलितों की चिंता करती है। लेकिन
जमीनी हकीकत इसके सर्वथा विपरीत है।
श्री यादव ने कहा है कि म.प्र. की धरती पर बैठकर सूरजभान कटारिया को यह दावा नहीं करना चाहिए कि म.प्र. में भाजपा सरकार दलितों के प्रति बड़ी संवेदनशील है। सच तो यह है कि कांगे्रस ने अपने शासन काल में काफी सोच-विचार के बाद दलितों के उत्थान और उनके अधिकारों की सुरक्षा की जवाबदारी सम्हालने के लिए पृथक विभाग और इसी वर्ग के कैबिनेट मंत्री की व्यवस्था लागू की थी। भाजपा ने प्रदेश में सत्ता में आने के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर आदिमजाति कल्याण विभाग के आदिवासी मंत्री के साथ अनुसूचित जाति (दलित) कल्याण विभाग को भी नत्थी कर दिया है। आपने कहा है कि म.प्र. में आदिवासी कल्याण का काम स्वयं में इतना व्यापक है कि आदिमजाति कल्याण मंत्री को अनुसूचित जाति के काम को देखने का समय ही नहीं मिल पाता। ऐसी दशा में सवाल उठता है कि दलित उत्थान के विभाग को अनुसूचित जाति वर्ग के मंत्री की बजाय आदिवासी मंत्री के हवाले करके भाजपा और उसके मुख्य मंत्री ने दलितों का कौन सा भला किया है ?
प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष ने कहा है कि भाजपा की इस दलित विरोधी मानसिकता का दुष्परिणाम प्रदेश के लाखों दलितों को उठाना पड़ रहा है। वर्ष 2003 के बाद से प्रदेश में उनके हितों की घोर उपेक्षा हो रही है। कांगे्रस सरकार ने श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रधान मंत्री काल में जो अनुसूचित जाति विशेषांश योजना लागू की थी और जिसके लिए म.प्र. सरकार को भी हर साल जो अरबों की धनराशि विभिन्न कार्यक्रमों के लिए मिलती है, भाजपा सरकार की उदासीनता के कारण उसका बड़ा हिस्सा हर साल लैप्स हो जाता है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति के लोगों की आर्थिक उन्नति के लिए जो निगम बनाया गया है और केंद्र उसकी योजनाओं के लिए सरकार से पैसा मिलता है वह भी डूबने की कगार पर पहुँच गया है और किसी भी दिन बंद हो सकता है। कांगे्रस शासनकाल में राज्य सरकार के अन्य विभाग इस वर्ग के लिए जो पूरक योजनाएं चला रहे थे, वे भी या तो बंद हो गईं हैं या निष्प्रभावी बना दी गई हैं।श्री यादव ने आगे कहा है कि राज्य सरकार की सेवाओं में दलित वर्ग के लिए जो आरक्षण की जो संवैधानिक व्यवस्था है, उसका भी लाभ इस वर्ग के युवाओं को नहीं मिल रहा है। एक तरफ तो बैकलॉग के हजारों पद वर्षों से खाली पड़े है |
श्री यादव ने कहा है कि म.प्र. की धरती पर बैठकर सूरजभान कटारिया को यह दावा नहीं करना चाहिए कि म.प्र. में भाजपा सरकार दलितों के प्रति बड़ी संवेदनशील है। सच तो यह है कि कांगे्रस ने अपने शासन काल में काफी सोच-विचार के बाद दलितों के उत्थान और उनके अधिकारों की सुरक्षा की जवाबदारी सम्हालने के लिए पृथक विभाग और इसी वर्ग के कैबिनेट मंत्री की व्यवस्था लागू की थी। भाजपा ने प्रदेश में सत्ता में आने के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर आदिमजाति कल्याण विभाग के आदिवासी मंत्री के साथ अनुसूचित जाति (दलित) कल्याण विभाग को भी नत्थी कर दिया है। आपने कहा है कि म.प्र. में आदिवासी कल्याण का काम स्वयं में इतना व्यापक है कि आदिमजाति कल्याण मंत्री को अनुसूचित जाति के काम को देखने का समय ही नहीं मिल पाता। ऐसी दशा में सवाल उठता है कि दलित उत्थान के विभाग को अनुसूचित जाति वर्ग के मंत्री की बजाय आदिवासी मंत्री के हवाले करके भाजपा और उसके मुख्य मंत्री ने दलितों का कौन सा भला किया है ?
प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष ने कहा है कि भाजपा की इस दलित विरोधी मानसिकता का दुष्परिणाम प्रदेश के लाखों दलितों को उठाना पड़ रहा है। वर्ष 2003 के बाद से प्रदेश में उनके हितों की घोर उपेक्षा हो रही है। कांगे्रस सरकार ने श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रधान मंत्री काल में जो अनुसूचित जाति विशेषांश योजना लागू की थी और जिसके लिए म.प्र. सरकार को भी हर साल जो अरबों की धनराशि विभिन्न कार्यक्रमों के लिए मिलती है, भाजपा सरकार की उदासीनता के कारण उसका बड़ा हिस्सा हर साल लैप्स हो जाता है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति के लोगों की आर्थिक उन्नति के लिए जो निगम बनाया गया है और केंद्र उसकी योजनाओं के लिए सरकार से पैसा मिलता है वह भी डूबने की कगार पर पहुँच गया है और किसी भी दिन बंद हो सकता है। कांगे्रस शासनकाल में राज्य सरकार के अन्य विभाग इस वर्ग के लिए जो पूरक योजनाएं चला रहे थे, वे भी या तो बंद हो गईं हैं या निष्प्रभावी बना दी गई हैं।श्री यादव ने आगे कहा है कि राज्य सरकार की सेवाओं में दलित वर्ग के लिए जो आरक्षण की जो संवैधानिक व्यवस्था है, उसका भी लाभ इस वर्ग के युवाओं को नहीं मिल रहा है। एक तरफ तो बैकलॉग के हजारों पद वर्षों से खाली पड़े है |

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