इराक में बंधक बने सभी भारतीय सुरक्षित
नई दिल्ली।
सरकार ने सोमवार को कहा कि इराक में बंधक बनाए गए भारतीय नागरिक सुरक्षित
हैं, और हिंसा से जूझ रहे इराक के मोसुल कस्बे को सुन्नी आतंकवादियों
द्वारा घेर लिए जाने के बाद भी उनकी रिहाई की कोशिशें जारी हैं। विदेश
मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने पत्रकारों को बताया कि इराक के
संघर्ष वाले इलाकों से भारतीय नागरिकों को निकाले जाने की कोशिशें की जा
रही हैं।
अकबरुद्दीन ने कहा कि सरकार ने अपने कई स्रोत लगा दिए हैं और इराक से लगातार सूचनाएं मिलना शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हम रोजाना आधार पर वहां से सूचनाएं प्राप्त करने और उनकी पुष्टि भी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं कि उन्हें अब तक कोई नुकसान नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे बताया कि संघर्ष वाले इलाकों से 17 भारतीय नागरिकों को निकाला जा चुका है। संघर्ष वाले इलाकों में फंसे बाकी भारतीय नागरिकों को वहां से निकाले जाने के लिए हम प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इराक के संघर्षग्रस्त इलाकों में लगभग 120 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, और 17 बाहर निकाले जा चुके हैं और तिरकित में मौजूद 46 भारतीय नर्सें भी सुरक्षित हैं। बंधक बनाए गए 39 नागरिकों पर मंडरा रहे खतरे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बंधक रहने के दौरान किसी तरह की सुरक्षा नहीं होती। भारत इराक के पड़ोसी देशों, जैसे सऊदी अरब के संपर्क में है, और इराक में संदिग्ध आएसआईएल आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए अपने नागरिकों की रिहाई में मदद करने के लिए मदद की गुहार की है।
इराक के मोसुल में अधिकांश भारतीय नागरिक पंजाब और हरियाणा के निवासी हैं, और वे वहां भवन निर्माण मजदूर, ड्राइवर या सफाईकर्मी के तौर पर काम करते हैं। एक सप्ताह पहले उन्हें इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांट (आईएसआईएल) के संदिग्ध आतंकियों ने बंधक बना लिया। आईएसआईएल के आतंकवादी उत्तरी ईरान के बड़े हिस्से में सघर्ष छेड़ चुके हैं, और मोसुल और तिरकिट पर कब्जा कर चुके हैं।
अकबरुद्दीन ने बताया कि इराक में 10,000 से भी अधिक भारतीय नागरिक हैं, और ऐसे नागरिक जो संघर्षग्रस्त इलाकों में नहीं हैं उनकी वापसी अनुबंध की शर्तों के आधार पर ही हो सकेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक इराक की 12 प्रमुख कंपनियों में कार्यरत हैं, और 'नजफ' में ज्यादा 2,500 भारतीय नागरिक सेवारत हैं। इराक में एक भारतीय की मौत की खबर पर अकबरुद्दीन ने बताया कि संबद्ध कंपनी से अभी ऐसी कोई खबर नहीं मिली है।
अकबरुद्दीन ने कहा कि सरकार ने अपने कई स्रोत लगा दिए हैं और इराक से लगातार सूचनाएं मिलना शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हम रोजाना आधार पर वहां से सूचनाएं प्राप्त करने और उनकी पुष्टि भी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं कि उन्हें अब तक कोई नुकसान नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे बताया कि संघर्ष वाले इलाकों से 17 भारतीय नागरिकों को निकाला जा चुका है। संघर्ष वाले इलाकों में फंसे बाकी भारतीय नागरिकों को वहां से निकाले जाने के लिए हम प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इराक के संघर्षग्रस्त इलाकों में लगभग 120 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, और 17 बाहर निकाले जा चुके हैं और तिरकित में मौजूद 46 भारतीय नर्सें भी सुरक्षित हैं। बंधक बनाए गए 39 नागरिकों पर मंडरा रहे खतरे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बंधक रहने के दौरान किसी तरह की सुरक्षा नहीं होती। भारत इराक के पड़ोसी देशों, जैसे सऊदी अरब के संपर्क में है, और इराक में संदिग्ध आएसआईएल आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए अपने नागरिकों की रिहाई में मदद करने के लिए मदद की गुहार की है।
इराक के मोसुल में अधिकांश भारतीय नागरिक पंजाब और हरियाणा के निवासी हैं, और वे वहां भवन निर्माण मजदूर, ड्राइवर या सफाईकर्मी के तौर पर काम करते हैं। एक सप्ताह पहले उन्हें इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांट (आईएसआईएल) के संदिग्ध आतंकियों ने बंधक बना लिया। आईएसआईएल के आतंकवादी उत्तरी ईरान के बड़े हिस्से में सघर्ष छेड़ चुके हैं, और मोसुल और तिरकिट पर कब्जा कर चुके हैं।
अकबरुद्दीन ने बताया कि इराक में 10,000 से भी अधिक भारतीय नागरिक हैं, और ऐसे नागरिक जो संघर्षग्रस्त इलाकों में नहीं हैं उनकी वापसी अनुबंध की शर्तों के आधार पर ही हो सकेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक इराक की 12 प्रमुख कंपनियों में कार्यरत हैं, और 'नजफ' में ज्यादा 2,500 भारतीय नागरिक सेवारत हैं। इराक में एक भारतीय की मौत की खबर पर अकबरुद्दीन ने बताया कि संबद्ध कंपनी से अभी ऐसी कोई खबर नहीं मिली है।

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