कब्जा वापस पाने के लिए इराकी सुरक्षा बलों का संघर्ष जारी
बगदाद : इराक में जिहादियों के नेतृत्व वाले चरमपंथियों के हाथों हार चुके अपने स्थानों को दोबारा हासिल करने के लिए इराकी सुरक्षा बल संघर्ष कर रहे हैं जबकि नए नेतृत्व के लिए एकजुट एवं सहमत होने को लेकर बढ़ते दबाव के बीच आज भी देश के नेता बंटे हुए नजर आएं।
अपना नाम अब इस्लामिक स्टेट बताने वाले संगठन के नेतृत्व में चरमपंथियों के उत्तरी इराक को रौंद डालने के करीब एक महीने बाद देश एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। इसका कोई सैन्य या राजनीतिक हल अभी दूर की कौड़ी नजर आ रही है।
इराकी सुरक्षा बल खुद को मिली हार के बाद अब फिर से संगठित हो रहे हैं। दरअसल, कुछ सैनिकों को अपना मोर्चा, हथियार और वर्दी छोड़नी पड़ी थी क्योंकि चरमपंथियों ने इराक के दूसरे शहर मोसुल को फतह कर लिया था और राजधानी बगदाद के करीब 80 किलोमीटर नजदीक पहुंच गए थे।
सरकार को रूस और ईरान से लड़ाकू विमान मिले हैं जबकि अमेरिका से खुफिया सूचना मिली है। सुन्नी समुदाय के गढ़ तिकरित को वापस हासिल करने की कोशिश को एक हफ्ते से अधिक हो गए हैं जिस पर इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पिछले महीने कब्जा कर लिया था लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।
विश्लेषकों के मुताबिक सुन्नी इलाकों में खुफिया सूचना का अभाव और लड़ाई के अनुभव की कमी इराकी बलों के लिए बाधक बन रही है। अल्पसंख्यक सुन्नी अरब के बीच शिया नीत अधिकारियों के प्रति बड़े पैमाने पर अविश्वास है।
अपना नाम अब इस्लामिक स्टेट बताने वाले संगठन के नेतृत्व में चरमपंथियों के उत्तरी इराक को रौंद डालने के करीब एक महीने बाद देश एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। इसका कोई सैन्य या राजनीतिक हल अभी दूर की कौड़ी नजर आ रही है।
इराकी सुरक्षा बल खुद को मिली हार के बाद अब फिर से संगठित हो रहे हैं। दरअसल, कुछ सैनिकों को अपना मोर्चा, हथियार और वर्दी छोड़नी पड़ी थी क्योंकि चरमपंथियों ने इराक के दूसरे शहर मोसुल को फतह कर लिया था और राजधानी बगदाद के करीब 80 किलोमीटर नजदीक पहुंच गए थे।
सरकार को रूस और ईरान से लड़ाकू विमान मिले हैं जबकि अमेरिका से खुफिया सूचना मिली है। सुन्नी समुदाय के गढ़ तिकरित को वापस हासिल करने की कोशिश को एक हफ्ते से अधिक हो गए हैं जिस पर इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पिछले महीने कब्जा कर लिया था लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।
विश्लेषकों के मुताबिक सुन्नी इलाकों में खुफिया सूचना का अभाव और लड़ाई के अनुभव की कमी इराकी बलों के लिए बाधक बन रही है। अल्पसंख्यक सुन्नी अरब के बीच शिया नीत अधिकारियों के प्रति बड़े पैमाने पर अविश्वास है।

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