18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे नहीं फोड़ेंगे दही हांडी
मुंबई। बांबे हाई कोर्ट ने सोमवार को मुंबई के गोविंदा मंडलों के प्रति सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के दही हांडी फोड़ने के लिए बनाए जाने वाले मानव पिरामिड में शामिल होने पर रोक लगा दी। अदालत ने यह आदेश दही हांडी फोड़ते हुए होने वाले हादसों के मद्देनजर दिया है। अदालत ने दही हांडी की ऊंचाई भी अधिकतम 20 फीट तक रखने का आदेश दिया।
जन्माष्टमी के अगले दिन मुंबई, ठाणे सहित महाराष्ट्र के सभी बड़े शहरों में मानव पिरामिड बनाकर दही से भरी हांडी फोड़ने का उत्सव मनाया जाता है। दही-हांडी फोड़नेवाले युवकों को गोविंदा कहते हैं। गोविंदाओं के संगठन अक्सर प्रायोजकों को आकर्षित करने के लिए 7 से 8 स्तरों तक मानव पिरामिड बनाने की कोशिश करते हैं। हांडी फोड़नेवाले मंडलों को आयोजनकर्ताओं द्वारा 25-25 लाख तक का ईनाम दिया जाता है। मानव पिरामिड बनाने की कोशिश में ऊंचाई से गिरने के कारण हर साल दो-तीन गोविंदाओं की मौत होती है और कई घायल हो जाते हैं।
ऐसी मौतों को रोकने के लिए ही मुंबई के एक स्वयंसेवी संगठन की याचिका पर सोमवार को बांबे हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति वीएम कानाडे एवं पीडी कोदे की खंडपीठ ने कहा कि हर साल इस खेल में दो-चार लोग मारे जाते हैं। वास्तव में यह उत्सव है, लेकिन अब यह व्यवसाय बन गया है इसलिए इस पर कुछ नियंत्रण आवश्यक है। न्यायालय ने आयोजनकर्ताओं को आयोजन स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही इन निर्देशों का उल्लंघन करते पाए जाने पर आयोजनकर्ताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी पुलिस को दिए हैं।
जन्माष्टमी के अगले दिन मुंबई, ठाणे सहित महाराष्ट्र के सभी बड़े शहरों में मानव पिरामिड बनाकर दही से भरी हांडी फोड़ने का उत्सव मनाया जाता है। दही-हांडी फोड़नेवाले युवकों को गोविंदा कहते हैं। गोविंदाओं के संगठन अक्सर प्रायोजकों को आकर्षित करने के लिए 7 से 8 स्तरों तक मानव पिरामिड बनाने की कोशिश करते हैं। हांडी फोड़नेवाले मंडलों को आयोजनकर्ताओं द्वारा 25-25 लाख तक का ईनाम दिया जाता है। मानव पिरामिड बनाने की कोशिश में ऊंचाई से गिरने के कारण हर साल दो-तीन गोविंदाओं की मौत होती है और कई घायल हो जाते हैं।
ऐसी मौतों को रोकने के लिए ही मुंबई के एक स्वयंसेवी संगठन की याचिका पर सोमवार को बांबे हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति वीएम कानाडे एवं पीडी कोदे की खंडपीठ ने कहा कि हर साल इस खेल में दो-चार लोग मारे जाते हैं। वास्तव में यह उत्सव है, लेकिन अब यह व्यवसाय बन गया है इसलिए इस पर कुछ नियंत्रण आवश्यक है। न्यायालय ने आयोजनकर्ताओं को आयोजन स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही इन निर्देशों का उल्लंघन करते पाए जाने पर आयोजनकर्ताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी पुलिस को दिए हैं।

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