कश्यप, ज्वाला-अश्विनी फाइनल में, सिंधु और गुरू को कांस्य
ग्लास्गो: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पारूपल्ली कश्यप 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने से केवल एक कदम दूर हैं और 2010 चैम्पियन ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा भी अपना खिताब बरकरार रखने की राह पर हैं जबकि युवा पीवी सिंधू और आरएमवी गुरूसाईदत्त ने कांस्य पदक हासिल किये।
दुनिया के 22वें नंबर के खिलाड़ी कश्यप ने इंग्लैंड के राजीव ओसफ से बदला चुकता करने के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया, जिससे वह 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में हारे थे और यहां मिश्रित टीम स्पर्धा के दौरान भी उनसे शिकस्त मिली थी। कश्यप ने एक घंटे 23 मिनट तक चले पुरुष एकल मुकाबले में एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दुनिया के 26वें नंबर के खिलाड़ी ओसफ को 18-21, 21-17, 21-18 से मात दी और कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया। अब कश्यप का सामना दुनिया के 40वें नंबर के सिंगापुर के डेरेक वोंग से होगा।
ज्वाला और अश्विनी की दिल्ली खेलों की स्वर्ण पदकधारी जोड़ी ने महिला युगल सेमीफाइनल में लाई पेई जिंग और लू यिन लिम पर 21-7, 21-12 से आसान जीत दर्ज की। अब फाइन में इस जोड़ी का भिड़ंत विवियान काह मुन हू और खे वेई वून की दुनिया की 18वें नंबर की मलेशियाई जोड़ी से होगी। सिंधु सेमीफाइनल में कनाडा की मिशेल ली से 20-22, 20-22 से हार गयी लेकिन उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में मलेशिया की जिंग यी टी को 34 मिनट तक चले मुकाबले में 23-21, 21-9 से हराया।
महिला एकल के कांस्य पदक के मुकाबले में सेमीफाइनल की हार की निराशा सिंधु के चेहरे पर साफ दिख रही थी और पहले गेम में उन्हें संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने नेट पर कई अंक गंवाये और हर बार जिंग को वापसी का मौका दिया। पहले ब्रेक पर सिंधु 11-10 से आगे थी, लेकिन इस गेम के आखिरी क्षणों में मुकाबला कड़ा हो गया। सिंधु आखिर में इसमें जीत दर्ज करने में सफल रही। उन्होंने हालांकि दूसरे गेम में पूरी तरह से दबदबा बनाये रखा।
सिंधु ने बाद में कहा, ‘यह मैच कोई भी जीत सकता था क्योंकि मैं काफी निराश थी। मैं फाइनल में जगह नहीं बनाने से निराश थी लेकिन अब मैं कांस्य पदक जीतकर खुश हूं। कम से कम मेरे पास कांस्य पदक है भले ही मैं ये पदक नहीं जीतना चाहती थी। मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने के लिये आयी थी और भारत में प्रत्येक मुझसे ऐसी उम्मीद लगाये हुए था।’ दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदकधारी कश्यप के लिये आज का दिन यादगार रहा क्योंकि अब उन पर 32 साल में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय पुरूष बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की उम्मीदें लगी हुई हैं। प्रकाश पादुकोण ने पुरूष एकल का स्वर्ण पदक 1979 में कनाडा के एडमंटन में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में जीता था तथा चार साल बाद सैयद मोदी ने यह कारनामा दिखाया था।
दुनिया के 22वें नंबर के खिलाड़ी कश्यप ने इंग्लैंड के राजीव ओसफ से बदला चुकता करने के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया, जिससे वह 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में हारे थे और यहां मिश्रित टीम स्पर्धा के दौरान भी उनसे शिकस्त मिली थी। कश्यप ने एक घंटे 23 मिनट तक चले पुरुष एकल मुकाबले में एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दुनिया के 26वें नंबर के खिलाड़ी ओसफ को 18-21, 21-17, 21-18 से मात दी और कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया। अब कश्यप का सामना दुनिया के 40वें नंबर के सिंगापुर के डेरेक वोंग से होगा।
ज्वाला और अश्विनी की दिल्ली खेलों की स्वर्ण पदकधारी जोड़ी ने महिला युगल सेमीफाइनल में लाई पेई जिंग और लू यिन लिम पर 21-7, 21-12 से आसान जीत दर्ज की। अब फाइन में इस जोड़ी का भिड़ंत विवियान काह मुन हू और खे वेई वून की दुनिया की 18वें नंबर की मलेशियाई जोड़ी से होगी। सिंधु सेमीफाइनल में कनाडा की मिशेल ली से 20-22, 20-22 से हार गयी लेकिन उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में मलेशिया की जिंग यी टी को 34 मिनट तक चले मुकाबले में 23-21, 21-9 से हराया।
महिला एकल के कांस्य पदक के मुकाबले में सेमीफाइनल की हार की निराशा सिंधु के चेहरे पर साफ दिख रही थी और पहले गेम में उन्हें संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने नेट पर कई अंक गंवाये और हर बार जिंग को वापसी का मौका दिया। पहले ब्रेक पर सिंधु 11-10 से आगे थी, लेकिन इस गेम के आखिरी क्षणों में मुकाबला कड़ा हो गया। सिंधु आखिर में इसमें जीत दर्ज करने में सफल रही। उन्होंने हालांकि दूसरे गेम में पूरी तरह से दबदबा बनाये रखा।
सिंधु ने बाद में कहा, ‘यह मैच कोई भी जीत सकता था क्योंकि मैं काफी निराश थी। मैं फाइनल में जगह नहीं बनाने से निराश थी लेकिन अब मैं कांस्य पदक जीतकर खुश हूं। कम से कम मेरे पास कांस्य पदक है भले ही मैं ये पदक नहीं जीतना चाहती थी। मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने के लिये आयी थी और भारत में प्रत्येक मुझसे ऐसी उम्मीद लगाये हुए था।’ दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदकधारी कश्यप के लिये आज का दिन यादगार रहा क्योंकि अब उन पर 32 साल में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय पुरूष बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की उम्मीदें लगी हुई हैं। प्रकाश पादुकोण ने पुरूष एकल का स्वर्ण पदक 1979 में कनाडा के एडमंटन में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में जीता था तथा चार साल बाद सैयद मोदी ने यह कारनामा दिखाया था।

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com