इंदिरा आवास योजना का नाम बदलने की तैयारी में मोदी सरकार?
नई दिल्ली : केंद्रीय योजनाओं में नेहरू-गांधी युग को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत कर चुकी मोदी सरकार ने अब इस दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोदी सरकार अब इंदिरा आवास योजना का नाम बदलने की तैयारी कर रही है। इस योजना का नया नाम अब राष्ट्रीय ग्राम आवास मिशन होगा। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर इस आशय की घोषणा कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस योजना में आवास के साथ साथ जल और विद्युत कनेक्शन तथा शौचालय सुविधा भी शामिल होगा।गौर हो कि आम बजट में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना कर इस अभियान की शुरुआत कर चुकी सरकार की निगाहें बहुचर्चित इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) योजना पर पहले से है। सरकार की योजना आईएवाई की जगह ग्रामीण क्षेत्रों में नई आवास योजना शुरू करने की है। इसके तहत सरकार दो से तीन लाख रुपये में सबके लिए मकान मिशन के तहत पक्का मकान निर्माण योजना शुरू करेगी।
जानकारी के अनुसार, सरकार अगले आठ वर्षों में राष्ट्रीय मिशन के तहत गरीबों के लिए 3.2 करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य बना रही है। इस योजना के तहत हर गरीब इंसान को मकान मिलने की संभावना है। साल 2022 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का लक्ष्य है कि वह हर गरीब इंसान को आवास, बिजली, पानी और टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध करवाएं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना को नई पहचान देने के प्रस्ताव के लिए एक परिचर्चा पत्र जारी किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस फ्लैगशिप योजना के तहत ग्रामीण इलाके में एक साल में 25 लाख मकाने बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 27300 करोड़ रुपये की आवश्कता होगी। फिलहाल सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के निर्माण के लिए प्रति यूनिट 70,000 रूपए और पहाड़ी क्षेत्रों में 75,000 रूपए का अनुदान देता है। हालांकि सरकार ने अप्रैल 2013 से घर के साथ शौचालयों का निर्माण अनिवार्य कर दिया था लेकिन पिछले वर्ष में शौचालयों की निर्माण की सूचना के अनुसार 38 फीसदी घरों में ही शौचालय का निर्माण हुआ है जो पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही बिजली और पानी उपलब्ध करवाना भी सरकारी की प्राथमिकता है।
सरकार ने ग्रामीण आवास योजना को पूरा करने तथा निगरानी रखने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रस्ताव किया है।नरेन्द्र मोदी ने संसद में एक भाषण के दौरान कहा कि हमारी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता होगी कि कोई भी गरीब इंसान 2022 तक घर के साथ बिजली, पानी और शौचालय के बिना नहीं रहे।
गौरतलब है कि इंदिरा आवास योजना सन 1985 में शुरू किया गया था और अब तक इस योजना के तहत 3.25 करोड़ ग्रामीण परिवारों को लाभ हुआ है। अब तक इस योजना में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किया गया, लेकिन चालू वर्ष में इस योजना के लिए 16,000 करोड़ रूपए का आवंटन किया है, जिसके तहत 25.19 लाख मकान बनाने का लक्ष्य है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस योजना के तहत 5.4 करोड़ परिवारों को कवर किया जाना अभी भी बाकी है।
बताया जा रहा है कि इस योजना में आवास के साथ साथ जल और विद्युत कनेक्शन तथा शौचालय सुविधा भी शामिल होगा।गौर हो कि आम बजट में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना कर इस अभियान की शुरुआत कर चुकी सरकार की निगाहें बहुचर्चित इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) योजना पर पहले से है। सरकार की योजना आईएवाई की जगह ग्रामीण क्षेत्रों में नई आवास योजना शुरू करने की है। इसके तहत सरकार दो से तीन लाख रुपये में सबके लिए मकान मिशन के तहत पक्का मकान निर्माण योजना शुरू करेगी।
जानकारी के अनुसार, सरकार अगले आठ वर्षों में राष्ट्रीय मिशन के तहत गरीबों के लिए 3.2 करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य बना रही है। इस योजना के तहत हर गरीब इंसान को मकान मिलने की संभावना है। साल 2022 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का लक्ष्य है कि वह हर गरीब इंसान को आवास, बिजली, पानी और टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध करवाएं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना को नई पहचान देने के प्रस्ताव के लिए एक परिचर्चा पत्र जारी किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस फ्लैगशिप योजना के तहत ग्रामीण इलाके में एक साल में 25 लाख मकाने बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 27300 करोड़ रुपये की आवश्कता होगी। फिलहाल सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के निर्माण के लिए प्रति यूनिट 70,000 रूपए और पहाड़ी क्षेत्रों में 75,000 रूपए का अनुदान देता है। हालांकि सरकार ने अप्रैल 2013 से घर के साथ शौचालयों का निर्माण अनिवार्य कर दिया था लेकिन पिछले वर्ष में शौचालयों की निर्माण की सूचना के अनुसार 38 फीसदी घरों में ही शौचालय का निर्माण हुआ है जो पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही बिजली और पानी उपलब्ध करवाना भी सरकारी की प्राथमिकता है।
सरकार ने ग्रामीण आवास योजना को पूरा करने तथा निगरानी रखने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रस्ताव किया है।नरेन्द्र मोदी ने संसद में एक भाषण के दौरान कहा कि हमारी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता होगी कि कोई भी गरीब इंसान 2022 तक घर के साथ बिजली, पानी और शौचालय के बिना नहीं रहे।
गौरतलब है कि इंदिरा आवास योजना सन 1985 में शुरू किया गया था और अब तक इस योजना के तहत 3.25 करोड़ ग्रामीण परिवारों को लाभ हुआ है। अब तक इस योजना में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किया गया, लेकिन चालू वर्ष में इस योजना के लिए 16,000 करोड़ रूपए का आवंटन किया है, जिसके तहत 25.19 लाख मकान बनाने का लक्ष्य है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस योजना के तहत 5.4 करोड़ परिवारों को कवर किया जाना अभी भी बाकी है।

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