पूर्व जनरल वीके सिंह के कितने विवाद!
नई दिल्ली : रिटायर सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह से जुड़े विवादों का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। सेना के कम से कम तीन वरिष्ठ अधिकारियों को उनके द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। ताजा मामला सुकना जमीन घोटाले का है, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। सेना की एक पंचाट ने रथ के खिलाफ हुई कार्रवाई को खारिज कर दिया है और कहा कि यह कार्रवाई मनमानी थी। पंचाट ने यह फैसला सुनाते हुए जनरल वीके सिंह पर भी निशाना साधा और सख्त टिप्पणी की।
लेफ्टिनेंट जनरल रथ ने अपनी याचिका में कहा था कि चूंकि वीके सिंह को उस समय के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश से नाराजगी थी, इसलिए उन्होंने इस मामले में उन सबको फंसाया। यह मामला एक निजी बिल्डर को सेना की जमीन दिए जाने के अनापत्ति प्रमाण पत्र से जुड़ा था। इसमें पीके रथ का कोर्ट मार्शल हुआ था। पंचाट ने उनको पूरी गरिमा बहाल करने और मुआवजा देने का फैसला दिया है। अब जनरल वीके सिंह चाहते हैं कि सरकार पंचाट के इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करे। सेना के मामले में अदालत में घसीटने का रिकार्ड बनाते लगते हैं जनरल वीके सिंह।
बहरहाल, रथ से पहले मौजूदा सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग का मामला आया था। उनके खिलाफ भी जनरल वीके सिंह ने कार्रवाई की थी और उनको तो उन्होंने डाकू तक कह डाला था। लेकिन जनरल सिंह के हटने के बाद सेना प्रमुख बने जनरल बिक्रम सिंह ने कार्रवाई खत्म की और सुहाग के सेना प्रमुख बनने का रास्ता साफ हुआ। मौजूदा सरकार ने भी इस पर सहमति दी। तीसरे अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह हैं। वीके सिंह का कहना है कि तेजिंदर सिंह ने घटिया टेट्रा ट्रक खरीद की मंजूरी देने के लिए उनको 14 करोड़ रुपए की रिश्वत का प्रस्ताव दिया था। इस मामले में हालांकि पहले सबूत नहीं होने की बता कही गई थी। लेकिन सरकार बनने और वीके सिंह के मंत्री बनने के बाद जांच एजेंसी पलट गई और सबूत होने की बात कहने लगी। तभी तेजिंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। हालांकि उनको भी अदालत ने जमानत दे दी है।
लेफ्टिनेंट जनरल रथ ने अपनी याचिका में कहा था कि चूंकि वीके सिंह को उस समय के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश से नाराजगी थी, इसलिए उन्होंने इस मामले में उन सबको फंसाया। यह मामला एक निजी बिल्डर को सेना की जमीन दिए जाने के अनापत्ति प्रमाण पत्र से जुड़ा था। इसमें पीके रथ का कोर्ट मार्शल हुआ था। पंचाट ने उनको पूरी गरिमा बहाल करने और मुआवजा देने का फैसला दिया है। अब जनरल वीके सिंह चाहते हैं कि सरकार पंचाट के इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करे। सेना के मामले में अदालत में घसीटने का रिकार्ड बनाते लगते हैं जनरल वीके सिंह।
बहरहाल, रथ से पहले मौजूदा सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग का मामला आया था। उनके खिलाफ भी जनरल वीके सिंह ने कार्रवाई की थी और उनको तो उन्होंने डाकू तक कह डाला था। लेकिन जनरल सिंह के हटने के बाद सेना प्रमुख बने जनरल बिक्रम सिंह ने कार्रवाई खत्म की और सुहाग के सेना प्रमुख बनने का रास्ता साफ हुआ। मौजूदा सरकार ने भी इस पर सहमति दी। तीसरे अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह हैं। वीके सिंह का कहना है कि तेजिंदर सिंह ने घटिया टेट्रा ट्रक खरीद की मंजूरी देने के लिए उनको 14 करोड़ रुपए की रिश्वत का प्रस्ताव दिया था। इस मामले में हालांकि पहले सबूत नहीं होने की बता कही गई थी। लेकिन सरकार बनने और वीके सिंह के मंत्री बनने के बाद जांच एजेंसी पलट गई और सबूत होने की बात कहने लगी। तभी तेजिंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। हालांकि उनको भी अदालत ने जमानत दे दी है।

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