उपराज्यपाल नजीब जंग पर कांग्रेस ने साधा निशाना
नई दिल्ली : उपराज्यपाल नजीब जंग पर निशाना साधते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने शहर में सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने के उनके प्रयास पर सवाल खड़ा किया और उनपर गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा भाजपा नेताओं के एक वर्ग के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने उपराज्यपाल के प्रयासों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आश्चर्य जताया कि यह पहल क्यों की जा रही है जब भाजपा विधानसभा चुनावों के बाद संख्याबल नहीं होने का हवाला देते हुए इस तरह के प्रयास को खारिज कर चुकी है।
उन्होंने गृह मंत्री पर उपराज्यपाल के कार्यालय को भाजपा कार्यालय में बदलने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के नेता खुलेआम जंग और दिल्ली सरकार के निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, ‘उपराज्यपाल नजीब जंग गृह मंत्री से निर्देश ले रहे हैं जो कि संविधान और दिल्ली की जनता का अपमान है। हम जानना चाहते हैं कि किस चीज ने प्रोत्साहित किया कि भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का प्रयास हो रहा है जबकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद इस तरह की पेशकश को ठुकरा दिया था।’
उन्होंने भाजपा से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की भी मांग की, क्योंकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव के बाद साफ तौर पर कहा था कि वह दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कोई अनुचित तरीका इस्तेमाल नहीं करेगी। शर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद उपराज्यपाल द्वारा भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन उसे इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अब पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए इतनी रुचि क्यों दिखा रही है। हम जानना चाहते हैं वह संख्या केसे जुटायेगी। जंग ने राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेज कर उनसे दिल्ली में सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को आमंत्रित करने की अनुमति मांगी है।
जंग ने अपनी रिपोर्ट में शहर की राजनीतिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण दिया है और शहर में एक निर्वाचित सरकार होने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की 49 दिन की सरकार के इस्तीफा देने के बाद 17 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। उप राज्यपाल ने कहा कि यद्यपि किसी भी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाने का दावा नहीं किया है, लेकिन भाजपा को आमंत्रित किया जा सकता है क्योंकि यह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।
जंग ने कहा कि सभी विकल्पों के मद्देनजर ताजा चुनाव कराए जाने पर विचार करने से पहले एक निर्वाचित सरकार की संभावना तलाशी जानी चाहिए। दिल्ली भाजपा के मुखिया सतीश उपाध्याय ने कहा कि यदि पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है तो वह इस पर गौर करेगी। भाजपा सूत्रों ने कहा कि लगभग सभी विधायक और दिल्ली के वरिष्ठ नेता तत्काल विधानसभा चुनाव के पक्ष में नहीं थे और वे शीर्ष नेतृत्व को पहले ही अपने विचारों से अवगत करा चुके हैं।
सहयोगी अकाली दल के एक विधायक को मिलाकर भाजपा के पास दिल्ली विधानसभा में 29 विधायक हैं और इसे सदन में बहुमत साबित करने के लिए पांच और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। भाजपा ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 31 सीटें जीती थीं, लेकिन तीन विधायकों हर्षवर्धन, रमेश बिधूड़ी और परवेश वर्मा के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद इसकी विधायक संख्या 28 रह गई।
तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में विधायकों की संख्या 67 रह गई। इस आंकड़े के अनुसार भाजपा को पांच और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी जिससे वह बहुमत के आंकड़े 34 तक पहुंच सके। आम आदमी पार्टी ने अपने पहले विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं और बाद में कांग्रेस के आठ विधायकों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी।
अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने भाजपा और कांग्रेस के विरोध के चलते जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं होने के मुद्दे पर 14 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। दिल्ली में 17 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने उपराज्यपाल के प्रयासों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आश्चर्य जताया कि यह पहल क्यों की जा रही है जब भाजपा विधानसभा चुनावों के बाद संख्याबल नहीं होने का हवाला देते हुए इस तरह के प्रयास को खारिज कर चुकी है।
उन्होंने गृह मंत्री पर उपराज्यपाल के कार्यालय को भाजपा कार्यालय में बदलने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के नेता खुलेआम जंग और दिल्ली सरकार के निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, ‘उपराज्यपाल नजीब जंग गृह मंत्री से निर्देश ले रहे हैं जो कि संविधान और दिल्ली की जनता का अपमान है। हम जानना चाहते हैं कि किस चीज ने प्रोत्साहित किया कि भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का प्रयास हो रहा है जबकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद इस तरह की पेशकश को ठुकरा दिया था।’
उन्होंने भाजपा से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की भी मांग की, क्योंकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव के बाद साफ तौर पर कहा था कि वह दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कोई अनुचित तरीका इस्तेमाल नहीं करेगी। शर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद उपराज्यपाल द्वारा भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन उसे इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अब पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए इतनी रुचि क्यों दिखा रही है। हम जानना चाहते हैं वह संख्या केसे जुटायेगी। जंग ने राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेज कर उनसे दिल्ली में सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को आमंत्रित करने की अनुमति मांगी है।
जंग ने अपनी रिपोर्ट में शहर की राजनीतिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण दिया है और शहर में एक निर्वाचित सरकार होने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की 49 दिन की सरकार के इस्तीफा देने के बाद 17 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। उप राज्यपाल ने कहा कि यद्यपि किसी भी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाने का दावा नहीं किया है, लेकिन भाजपा को आमंत्रित किया जा सकता है क्योंकि यह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।
जंग ने कहा कि सभी विकल्पों के मद्देनजर ताजा चुनाव कराए जाने पर विचार करने से पहले एक निर्वाचित सरकार की संभावना तलाशी जानी चाहिए। दिल्ली भाजपा के मुखिया सतीश उपाध्याय ने कहा कि यदि पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है तो वह इस पर गौर करेगी। भाजपा सूत्रों ने कहा कि लगभग सभी विधायक और दिल्ली के वरिष्ठ नेता तत्काल विधानसभा चुनाव के पक्ष में नहीं थे और वे शीर्ष नेतृत्व को पहले ही अपने विचारों से अवगत करा चुके हैं।
सहयोगी अकाली दल के एक विधायक को मिलाकर भाजपा के पास दिल्ली विधानसभा में 29 विधायक हैं और इसे सदन में बहुमत साबित करने के लिए पांच और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। भाजपा ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 31 सीटें जीती थीं, लेकिन तीन विधायकों हर्षवर्धन, रमेश बिधूड़ी और परवेश वर्मा के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद इसकी विधायक संख्या 28 रह गई।
तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में विधायकों की संख्या 67 रह गई। इस आंकड़े के अनुसार भाजपा को पांच और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी जिससे वह बहुमत के आंकड़े 34 तक पहुंच सके। आम आदमी पार्टी ने अपने पहले विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं और बाद में कांग्रेस के आठ विधायकों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी।
अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने भाजपा और कांग्रेस के विरोध के चलते जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं होने के मुद्दे पर 14 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। दिल्ली में 17 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

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