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नर्मदा किनारे के जिलों में नए सिरे से होगी प्रशासनिक जमावट, कई विभागों में होंगे तबादले

भोपाल। प्रदेश में अवैध उत्खनन पर अंकुश लगाना सरकार के लिए मुसीबत बन चुका है, खासकर जिन जिलों से होकर नर्मदा नदी निकली है, वहां अवैध उत्खन रोकना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में अब नर्मदा किनारे के करीब 16 जिलों में कलेक्टर, एसपी के अलावा खनिज, राजस्व एवं पुलिस विभाग में लंबे समय से जमे अफसरों को जिले से बाहर किया जाएगा। नर्मदा नदी में खनन रोकने के बाद सरकार द्वारा नई नीति को लेकर किए जा रहे मंथन में यह बात सामने आई है कि लंबे समय से जिलों में पदस्थ अफसरों की भी माफिया के साथ सांठगांठ है। ऐसे में इन जिलों में नए सिरे से प्रशासनिक जमावट की जाएगी। 

अवैध उत्खनन को लेकर पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में जो राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है, उससे यह बात साफ हो चुकी है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अवैध उत्खनन प्रमुख मुद्दा बनेगा। जिसमें विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के निशारे पर भी सरकार रहेगी। क्योंकि अवैध उत्खनन को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक भाजपा विधायक एवं पदाधिकारी सरकार के खिलाफ मुखर हो चुके हैं, लेकिन संगठन की ओर से उन्हें अनुशासन का डंडा दिखाकर चुप कराया जाता रहा है। चूंकि अब प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा में जा रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा नर्मदा समेत अन्य नदियों से रेत उत्खनन पर लगाई गई रोक, किसी रणनीति का हिस्सा है। खबर है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वष्ठि अफसरों की समिति से कहा है कि नर्मदा किनारे के जिलों में अवैध उत्खनन रोकने के ठोस प्रयास होने चाहिए। सिर्फ अवैध उत्खनन का दिखावा नहीं होना चाहिए। ऐसे में अफसरों ने मुख्यमंत्री को नर्मदा किनारे के जिलों में नए सिरे से प्रशासनिक जमावट करने का सुझाव दिया है। जिसके तहत वन, राजस्व, पुलिस, खनिज विभाग के वे अफसर हटेंगे जो सालों से जमे हुए हैं। साथ ही इन जिलों में कलेक्टर-एसपी एवं अन्य प्रशासनिक अफसर भी बदलें जाएंगे। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी मुख्यमंत्री ने मंजूरी नहीं दी है। 

ये हैं नर्मदा किनारे के जिले

प्रदेश में नर्मदी नदी होशंगाबाद, सीहोर, जबलपुर, शहडोल, मंडला, बड़वानी, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, धार, अनूपपुर, डिंडौरी, नरसिंहपुर, उमरिया, कटनी, अलीराजपुर जिले से होकर प्रवाहित होती है। 

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