इंदौर हादसा: 4 मासूमों का हुआ अंतिम संस्कार
इंदौर : यहां बाइपास पर शुक्रवार को हुए हादसे में मृत चारों बच्चों श्रुति, कृति, स्वास्तिक और हरमीत कौर की एकसाथ अंतिम संस्कार हुआ। बच्चों की अंतिम यात्रा में मानो पूरा शहर उमड़ पड़ा। हादसे के चलते शनिवार को शहर के सभी स्कूलों में छुट्टी रही वहीं सभी प्रमुख बाजार आधे दिन बंद रहे।
एक ही इलाके के रहने वाले थे बच्चे
हादसे में मृत सभी बच्चे खातीवाला टैंक क्षेत्र के रहने वाले थे। शुक्रवार शाम से ही ये पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ था। शनिवार को क्षेत्र की सभी दुकानें बंद थीं। सुबह से ही लोग बच्चों के घर के बाहर जुट गए थे।
श्रुति लुधियानी की अंतिम यात्रा कार में निकाली गई। उसके चाचा ने बताया कि बच्ची को कार में घूमने का बहुत शौक था, इसलिए उसकी पसंदीदा कार को फूलों से सजाकर उसे विदा किया। अंतिम विदाई के दौरान श्रुति को मां की चुनरी ओढ़ाई गई। श्रुति के परिजन ने उसकी आंखें दान की हैं। बता दें कि श्रुति का जन्म माता-पिता की शादी के 22 साल बाद हुआ था।
एक ही इलाके के रहने वाले थे बच्चे
हादसे में मृत सभी बच्चे खातीवाला टैंक क्षेत्र के रहने वाले थे। शुक्रवार शाम से ही ये पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ था। शनिवार को क्षेत्र की सभी दुकानें बंद थीं। सुबह से ही लोग बच्चों के घर के बाहर जुट गए थे।
श्रुति लुधियानी की अंतिम यात्रा कार में निकाली गई। उसके चाचा ने बताया कि बच्ची को कार में घूमने का बहुत शौक था, इसलिए उसकी पसंदीदा कार को फूलों से सजाकर उसे विदा किया। अंतिम विदाई के दौरान श्रुति को मां की चुनरी ओढ़ाई गई। श्रुति के परिजन ने उसकी आंखें दान की हैं। बता दें कि श्रुति का जन्म माता-पिता की शादी के 22 साल बाद हुआ था।
स्वस्तिक पंड्या का 17 दिसंबर को जन्मदिन था। मां ने फेसबुक पोस्ट कर उसे अच्छा इंसान बनने की सीख दी थी। स्वास्तिक की अंतिम यात्रा निकली तो पूरी गली में मातम छा गया।
कृति की आंखें-स्किन दान कर दीं
कृति की आंखें-स्किन दान कर दीं
बेटी कृति को खो चुके पिता प्रशांत अग्रवाल ने मौत के बाद उसकी आंखें और स्किन दान करने का फैसला किया। पोस्टमॉर्टम से पहले उन्होंने डाॅक्टरों से कहा कि बेटी की आंखें किसी को दान कर दो ताकि उसकी आंखें किसी और को रोशनी दे सकें।
वॉट्सऐप पर उन्होंने लिखा, "यातायात कर्मियों और आरटीओ को हेलमेट और नो पार्किंग से पैसा कमाने से फुर्सत मिल जाए और आज हुए एक्सीडेंट से थोड़ी शर्म आए तो कल से सारी स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर और सुरक्षा उपकरणों की जांच कर लेना।"
मत करो मेरी लाड़ली का पीएम
मत करो मेरी लाड़ली का पीएम
हरमीत उर्फ खुशी की मौत ने मां पिता सहित पूरे परिवार को झकझोर दिया। मां, बेटी से मिलने के लिए बेचैन है। बोलीं- मत करो मेरी लाड़ली का पीएम। तबीयत खराब होने के कारण पिता चल नहीं पाते। बेटी का शव घर पहुंचा तो वे बदहवास हो गए। सुबह बड़ी संख्या में लोग बेटी को विदा करने पहुंचे।
ऐसे हुआ हादसा
ऐसे हुआ हादसा
शुक्रवार को डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में छुट्टी के बाद बस 12 बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बाइपास पर बस का स्टेयरिंग फेल होने से ड्राइवर का बैलेंस बिगड़ गया। बस डिवाइडर पार कर गलत दिशा में घुस गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई।
ड्राइवर स्टेयरिंग पर फंस गया और उसने उसने वहीं पर दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास गुजर रहे लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। बच्चों की फैमिली को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली। जो जिस हाल में था वैसे ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।

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