20 साल की मन्नतों के बाद हुई थी श्रुति, माता की चुनरी में हुई विदा
इंदौर : शनिवार का दिन इंदौर के लिए शायद सबसे दुखद रहा। बायपास पर शुक्रवार को हुए बस एक्सीडेंट में मृत चारों बच्चों की अंतिम यात्रा खातीवाला क्षेत्र से निकली। एक के बाद एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई। हजारों लोग रीजनल पार्क स्थित मुक्तिधाम पर बच्चों को अंतिम विदाई देने पहुंचे। यात्रा में शामिल लोग परिजनों को सांत्वना देते रहे। नम आंखों से लोगों ने मासूमों को विदाई दी।
हादसे में मृत मासूम श्रुति के चाचा मोहन लुधियानी ने बताया कि वह परिवार में इकलौती बेटी थी। उसका जन्म 20 साल की मन्नतों के बाद हुआ था। रात में पीएम के बाद जब बॉडी आई तो घर में चीख पुकार मच गई। रातभर घर में भजन कीर्तन चलता रहा और मां बेटी के पास बैठ उसे बस निहारती रही। परिजनों ने बताया कि उसे कार में घूमने का बहुत शौक था इसलिए उसकी अंतिम यात्रा कार में निकाली गई। कार को फूलों से सजाया गया और मासूम को मां की चुनरी ओढ़ाकर उसे विदा किया।
हादसे में मृत स्वस्तिक का 17 दिसंबर को जन्मदिन था। मां ने फेसबुक पर उसके साथ का फोटो भी पोस्ट किया था। गॉड ब्लेस यू बेटा...अच्छे इंसान बनना भी लिखा था। शनिवार को जब स्वस्तिक की अंतिम यात्रा निकली तो पूरे मोहल्ले में मातम छा गया।
बेटी कृति को खो चुके पिता प्रशांत अग्रवाल ने मौत के बाद उसकी आंखें और त्वचा दान करने का निर्णय किया। पोस्टमार्टम से पहले उन्होंने डाॅक्टरों से कहा कि बेटी की आंखें किसी को दान कर दो ताकि उसकी आंखें किसी और को रोशनी दे सके। वाट्सएप पर उन्होंने लिखा कि यातायात कर्मियों और आरटीओ को हेलमेट और नो पार्किंग से पैसा कमाने से फुरसत मिल जाए और आज हुए एक्सीडेंट से थोड़ी शर्म आए तो कल से सारी स्कूल बसों में स्पीड गर्वनर और सुरक्षा उपकरणों की जांच कर लेना।
मासूम हरमीत उर्फ खुशी की मौत ने मां पिता सहित पूरे परिवार को झकझोर दिया। मां बेटी से मिलने के लिए बेचैन है बोली- मत करो मेरी लाड़ली का पीएम। तबीयत खराब होने के कारण पिता चल नहीं पाते हैं। बेटी का शव घर पहुंचा तो वे बदहवास हो गए। सुबह बड़ी संख्या में लोग बेटी को विदा करने पहुंचे।
ऐसे हुआ हादसा
शुक्रवार को डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में छुट्टी के बाद बस 12 बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस का स्टयरिंग फेल होने से चालक का संतुलन बस पर से हट गया। बस डिवायडर फादते हुए गलत दिशा में घुस गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस चालक स्टेयरिंग पर फंस गया जससे उसने वहीं पर दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास गुजर रहे लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। बच्चों की फैमिली को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली जो जिस हाल में था वैसे ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।
हादसे में मृत मासूम श्रुति के चाचा मोहन लुधियानी ने बताया कि वह परिवार में इकलौती बेटी थी। उसका जन्म 20 साल की मन्नतों के बाद हुआ था। रात में पीएम के बाद जब बॉडी आई तो घर में चीख पुकार मच गई। रातभर घर में भजन कीर्तन चलता रहा और मां बेटी के पास बैठ उसे बस निहारती रही। परिजनों ने बताया कि उसे कार में घूमने का बहुत शौक था इसलिए उसकी अंतिम यात्रा कार में निकाली गई। कार को फूलों से सजाया गया और मासूम को मां की चुनरी ओढ़ाकर उसे विदा किया।
हादसे में मृत स्वस्तिक का 17 दिसंबर को जन्मदिन था। मां ने फेसबुक पर उसके साथ का फोटो भी पोस्ट किया था। गॉड ब्लेस यू बेटा...अच्छे इंसान बनना भी लिखा था। शनिवार को जब स्वस्तिक की अंतिम यात्रा निकली तो पूरे मोहल्ले में मातम छा गया।
बेटी कृति को खो चुके पिता प्रशांत अग्रवाल ने मौत के बाद उसकी आंखें और त्वचा दान करने का निर्णय किया। पोस्टमार्टम से पहले उन्होंने डाॅक्टरों से कहा कि बेटी की आंखें किसी को दान कर दो ताकि उसकी आंखें किसी और को रोशनी दे सके। वाट्सएप पर उन्होंने लिखा कि यातायात कर्मियों और आरटीओ को हेलमेट और नो पार्किंग से पैसा कमाने से फुरसत मिल जाए और आज हुए एक्सीडेंट से थोड़ी शर्म आए तो कल से सारी स्कूल बसों में स्पीड गर्वनर और सुरक्षा उपकरणों की जांच कर लेना।
मासूम हरमीत उर्फ खुशी की मौत ने मां पिता सहित पूरे परिवार को झकझोर दिया। मां बेटी से मिलने के लिए बेचैन है बोली- मत करो मेरी लाड़ली का पीएम। तबीयत खराब होने के कारण पिता चल नहीं पाते हैं। बेटी का शव घर पहुंचा तो वे बदहवास हो गए। सुबह बड़ी संख्या में लोग बेटी को विदा करने पहुंचे।
ऐसे हुआ हादसा
शुक्रवार को डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में छुट्टी के बाद बस 12 बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस का स्टयरिंग फेल होने से चालक का संतुलन बस पर से हट गया। बस डिवायडर फादते हुए गलत दिशा में घुस गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस चालक स्टेयरिंग पर फंस गया जससे उसने वहीं पर दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास गुजर रहे लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। बच्चों की फैमिली को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली जो जिस हाल में था वैसे ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।
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