गुना : सरकारी दफ्तरों में यूनिकोड फोन्ट में करना होगा काम
कार्यालय में पदस्थ बाबू और लिपिकों को दिए निर्देश, सरकारी दफ्तरों को पेपर लैस बनाने नई व्यवस्था
राजकुमार पंत
गुना, ब्यूरो। सरकारी दफ्तरों में बाबूओं व ऑपरेटरों द्वारा मनचाही फोन्ट में हिंदी टाईपिंग कर दस्तावेजों को तैयार करने पर रोक लगा दी गई है। अब सरकारी कार्यालयों में पदस्थ बाबू और लिपिकों को सरकारी लेटर केवल यूनिकोड फोन्ट में ही टाईपिंग करने के निर्देश दिए गए है। यदि इन्होंने यूनिकोड के स्थान पर किसी अन्य फोन्ट में टाइपिंग कर लेटर तैयार किया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सूचना प्रोद्योगिकी विभाग के माध्यम से प्रदेश में सरकारी दफ्तरों को पेपर लैस बनाने के लिए ई-ऑफिस की कल्पना साकार करने के लिए सभी विभागों में टाईपिंग में एकरूपता लाने की कवायद शुरू की है। इससे सभी विभागों के लेटर एक ही फोन्ट में होने से ऑनलाइन करने में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी। इसके लिए सभी विभागों को आदेश जारी कर दिए हैं।
मनमानी टाइपिंग पर कार्रवाई
राजस्व विभाग प्रमुख सचिव अरुण पाण्डेय ने सभी जिलाधिकारियों से विभागों में टाइपिंग केवल यूनिकोड फोन्ट में ही करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई लिपिक ऐसा करने से मना करता है तो उसे 15 दिन की चेतावनी दी जाएगी। बाद में ऐसे कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट है कि किसी भी स्थिति में कृतिदेव, देवलीपी या अन्य फोन्ट में पत्राचार नहीं किया जाएगा।
फोन्टर्स से हो रही परेशानी
सूचना प्रोद्योगिकी विभाग के अनुसार हिंदी टाइपिंग के अलग-अलग फोन्ट को वैश्विक मान्यता नहीं है। इससे कार्य व्यवहार में एकरूपता का आभाव रहता है। साथ ही अन्य फोन्ट के पत्रों को उपयोग करने से पहले संबंधित फोन्ट को डाउनलोड करना पड़ता है। इन फोन्ट के दस्तावेजों को ई-मेल इंटरनेट से संचरित करना संभव नहीं होता है। इससे कार्य में कठिनाई आती है। एक ही फोन्ट से कार्य करने से सभी को सुविधा हो जाएगी। शासन सभी विभागों को पेपरलैस करने के लिए ई-ऑफिस की ओर बढ़ रही है। साथ ही कार्यालयों में कार्य की सुगमता भी होगी। कार्यालयों के कम्प्यूटर में यूनीकोड के फोन्ट इंस्टाल नहीं होने के कारण कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के कारण काम अटका हुआ है।

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