मप्र के नक्सल प्रभावित 44 गाँव अक्षय ऊर्जा से होंगे रोशन
भोपाल। मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों के 44 गाँव अक्षय ऊर्जा से
विद्युत उत्पादन कर रोशन किये जायेंगे। इन गाँव को सौर ऊर्जा से
विद्युतीकरण करने से करीब 4,437 परिवार लाभान्वित होंगे। इस योजना पर 37
करोड़ 62 लाख रुपये की राशि खर्च की जायेगी। योजना की कुल विद्युत उत्पादन
क्षमता 762 किलो वॉट है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा अध्यक्ष मध्यप्रदेश
ऊर्जा विकास निगम श्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में आज यहाँ निगम के
संचालक मंडल की बैठक में योजना की स्वीकृति प्रदान की गई।
श्री शुक्ल ने बताया कि योजना में गाँवों को विद्युतीकृत करने की कार्यवाही शीघ्र शुरू की जायेगी। योजना से नक्सल प्रभावित बालाघाट, शहडोल, उमरिया, सीधी एवं सिंगरौली जिलों के गाँव लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत सरकार के रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कार्पोरेशन, विघुत मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा डिस्ट्रीब्यूटेड जनरेशन (डी.डी.जी) कार्यक्रम में ऐसे गाँव जो अविद्युतीकृत/आंशिक विद्युतीकरण हैं को अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत्तीकृत करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों में उपलब्ध संसाधन जैसे बायोमास, बायोफ्यूल, मिनीहाइड्रो, सोलर अथवा बायोगैस आदि से गाँव को विद्युतीकृत करने का प्रावधान है। वर्तमान में डी.डी.जी प्रोग्राम में प्रदेश के 44 गाँव को सौर ऊर्जा संयंत्रों से विद्युतीकृत करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्वीकृति दी गई है।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि योजना में प्रदेश के 44 गाँव के प्रत्येक रहवासी के घर में 11 या 18 वॉट की 2 सी.एफ.एल. तथा 60 वॉट का पॉवर पाइंट लगाया जाएगा। योजना में इन गाँव में व्यावसायिक गतिविधियों में आटा चक्की तथा सामुदयिक भवन आदि के लिए विद्युत व्यवस्था एवं सार्वजनिक स्थलों के लिये स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था का भी प्रावधान है। योजना में भारत सरकार के रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कार्पोरेशन, विघुत मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा 90 प्रतिशत का अनुदान तथा शेष 10 प्रतिशत राशि की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।बैठक में प्रमुख सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा निगम के प्रबंध संचालक श्री एस.आर. मोहन्ती, प्रबंध संचालक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी श्री नितेश व्यास भी उपस्थित थे।
श्री शुक्ल ने बताया कि योजना में गाँवों को विद्युतीकृत करने की कार्यवाही शीघ्र शुरू की जायेगी। योजना से नक्सल प्रभावित बालाघाट, शहडोल, उमरिया, सीधी एवं सिंगरौली जिलों के गाँव लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत सरकार के रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कार्पोरेशन, विघुत मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा डिस्ट्रीब्यूटेड जनरेशन (डी.डी.जी) कार्यक्रम में ऐसे गाँव जो अविद्युतीकृत/आंशिक विद्युतीकरण हैं को अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत्तीकृत करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों में उपलब्ध संसाधन जैसे बायोमास, बायोफ्यूल, मिनीहाइड्रो, सोलर अथवा बायोगैस आदि से गाँव को विद्युतीकृत करने का प्रावधान है। वर्तमान में डी.डी.जी प्रोग्राम में प्रदेश के 44 गाँव को सौर ऊर्जा संयंत्रों से विद्युतीकृत करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्वीकृति दी गई है।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि योजना में प्रदेश के 44 गाँव के प्रत्येक रहवासी के घर में 11 या 18 वॉट की 2 सी.एफ.एल. तथा 60 वॉट का पॉवर पाइंट लगाया जाएगा। योजना में इन गाँव में व्यावसायिक गतिविधियों में आटा चक्की तथा सामुदयिक भवन आदि के लिए विद्युत व्यवस्था एवं सार्वजनिक स्थलों के लिये स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था का भी प्रावधान है। योजना में भारत सरकार के रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कार्पोरेशन, विघुत मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा 90 प्रतिशत का अनुदान तथा शेष 10 प्रतिशत राशि की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।बैठक में प्रमुख सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा निगम के प्रबंध संचालक श्री एस.आर. मोहन्ती, प्रबंध संचालक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी श्री नितेश व्यास भी उपस्थित थे।

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