मध्यप्रदेश को लगातार दूसरी बार-कृषि कर्मण पुरस्कार
भोपाल । भारत सरकार कृषि मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को लगातार दूसरी बार वर्ष 2012-13 में कुल खाद्यान्न उत्पादन वृद्धि की श्रेणी में ' कृषि कर्मण अवार्ड '' देने की घोषणा की गई है। इस अवार्ड के लिए राज्यों के कृषि उत्पादन के मूल्यांकन के साथ ही किसानों के लिए योजनाओं के कियान्वयन तथा नीतिगत प्रयासों में श्रेष्ठता भी देखी जाती है।
वर्ष 2012-13 में आन्ध्रप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश का चयन मुख्य प्रतिस्पर्धी राज्यों के रूप में किया गया था। वर्ष भर किए गए नवोन्मेष प्रयास और अनाज तथा दलहनी फसलों के क्षेत्राच्छादन के साथ उत्पादन और उत्पादकता में उत्कृष्ट उपलब्धियों के फलस्वरूप अंतिम रूप से इस प्रतिष्ठापूर्ण पुरस्कार के लिए मध्यप्रदेश का चयन किया गया। इससे पूर्व 15 जनवरी 2013 को राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को यह अवार्ड प्रदान किया गया था। इस अवार्ड में 2 करोड़ रुपये की राशि के साथ प्रतीक चिन्ह तथा प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। 'कृषि कर्मण अवार्ड'' दूसरी बार मुख्यमंत्री श्री चौहान 10 फरवरी 2014 को राष्ट्रपति से ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन भी उपस्थित रहेंगे।
यह पुरस्कार किसान-कल्याण तथा कृषि विकास दर को बनाए रखकर उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर होने की रणनीति की सफलता का प्रतीक है। इसका श्रेय राज्य शासन की किसानों की हितकारी नीति के साथ प्रदेश के किसानों के अथक प्रयास और नवाचार अपनाने के प्रति तत्परता को भी जाता है। इससे भी बढ़कर हमारे लिए गर्व का विषय यह है कि हम देश की बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता को पूरा करने में प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ा सकें।
खाद्यान्न उत्पादन में तीव्र वृद्धि
फसलों की उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रदेश में सुनियोजित रणनीति को क्रियान्वित किया जा रहा है। इसमें खेती के प्रत्येक घटक तथा प्रत्येक चरण में सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में विगत पाँच वर्ष में खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए वर्ष 2007-08 के कुल खाद्यान्न उत्पादन 128.90 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले वर्ष 2012-13 में 287.35 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ। कुल खाद्यान्न उत्पादन में यह वृद्धि वर्ष 2011-12 में हुए उत्पादन से 25.11 प्रतिशत अधिक है। उत्पादन वृद्धि में गेहूँ की भूमिका सर्वाधिक है। गेहूँ का उत्पादन वर्ष 2007-08 में 67.73 लाख मीट्रिक टन था जो वर्ष 2012-13 में 161.25 लाख मीट्रिक टन हो गया। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश तथा पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। यद्यपि हमारा लक्ष्य पंजाब से आगे निकल कर दूसरे स्थान पर पहुँचना है। गेहूँ के इस विपुल उत्पादन का प्रभाव समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी 85 लाख मीट्रिक टन से अधिक तथा मंडी समितियों में आवक 120.09 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहा है। गेहूँ के उत्पादन में यह वृद्धि वर्ष 2011-12 में हुए उत्पादन से 10.87 प्रतिशत अधिक है।
वर्ष 2012-13 में आन्ध्रप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश का चयन मुख्य प्रतिस्पर्धी राज्यों के रूप में किया गया था। वर्ष भर किए गए नवोन्मेष प्रयास और अनाज तथा दलहनी फसलों के क्षेत्राच्छादन के साथ उत्पादन और उत्पादकता में उत्कृष्ट उपलब्धियों के फलस्वरूप अंतिम रूप से इस प्रतिष्ठापूर्ण पुरस्कार के लिए मध्यप्रदेश का चयन किया गया। इससे पूर्व 15 जनवरी 2013 को राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को यह अवार्ड प्रदान किया गया था। इस अवार्ड में 2 करोड़ रुपये की राशि के साथ प्रतीक चिन्ह तथा प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। 'कृषि कर्मण अवार्ड'' दूसरी बार मुख्यमंत्री श्री चौहान 10 फरवरी 2014 को राष्ट्रपति से ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन भी उपस्थित रहेंगे।
यह पुरस्कार किसान-कल्याण तथा कृषि विकास दर को बनाए रखकर उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर होने की रणनीति की सफलता का प्रतीक है। इसका श्रेय राज्य शासन की किसानों की हितकारी नीति के साथ प्रदेश के किसानों के अथक प्रयास और नवाचार अपनाने के प्रति तत्परता को भी जाता है। इससे भी बढ़कर हमारे लिए गर्व का विषय यह है कि हम देश की बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता को पूरा करने में प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ा सकें।
खाद्यान्न उत्पादन में तीव्र वृद्धि
फसलों की उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रदेश में सुनियोजित रणनीति को क्रियान्वित किया जा रहा है। इसमें खेती के प्रत्येक घटक तथा प्रत्येक चरण में सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में विगत पाँच वर्ष में खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए वर्ष 2007-08 के कुल खाद्यान्न उत्पादन 128.90 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले वर्ष 2012-13 में 287.35 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ। कुल खाद्यान्न उत्पादन में यह वृद्धि वर्ष 2011-12 में हुए उत्पादन से 25.11 प्रतिशत अधिक है। उत्पादन वृद्धि में गेहूँ की भूमिका सर्वाधिक है। गेहूँ का उत्पादन वर्ष 2007-08 में 67.73 लाख मीट्रिक टन था जो वर्ष 2012-13 में 161.25 लाख मीट्रिक टन हो गया। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश तथा पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। यद्यपि हमारा लक्ष्य पंजाब से आगे निकल कर दूसरे स्थान पर पहुँचना है। गेहूँ के इस विपुल उत्पादन का प्रभाव समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी 85 लाख मीट्रिक टन से अधिक तथा मंडी समितियों में आवक 120.09 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहा है। गेहूँ के उत्पादन में यह वृद्धि वर्ष 2011-12 में हुए उत्पादन से 10.87 प्रतिशत अधिक है।

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