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ओडिशा में 1553 गांव बाढ़ से प्रभावित

भुवनेश्वर : ओड़िशा में महानदी के डेल्टा क्षेत्र का विशाल हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है और राज्य में भारी बारिश एवं बाढ़ से मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गयी है। विशेष राहत आयुक्त पी के महापात्रा ने कहा कि 23 जिलों में 89 प्रखंडों के 1553 गांव में 9.95 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

विशेष राहत आयुक्त ने कहा, ‘महानदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से उपर बह रही है लेकिन भयंकर नुकसान का खतरा नहीं है क्योंकि हीराकुड जलाशय में जलप्रवाह घट गया है। ’ महापात्रा के अनुसार कल सात और लोगों के मरने की खबर आने के साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ एवं भारी बारिश से मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गयी है। डूबने या दीवार के ढह जाने से ज्यादातर लोगों की जान गयी। उन्होंने कहा, ‘यह राहत की बात है कि भयंकर बाढ़ का खतरा टल गया। मुंडूली में महानदी में जलप्रवाह करीब 11 लाख क्यूसेक है जबकि आशंका 12 लाख क्यूसेक से अधिक की थी। ’

हीराकुड बांध के मुख्य अभियंता विश्वजीत मोहंती ने बताया कि हीराकुंड जलाशय में 628.08 फुट पानी है जबकि उसकी क्षमता 630 फुट है। अतिरिक्त प्रवाह को बह जाने देने के लिए उसके 64 में 50 जलद्वार खोल दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नदी में जलप्रवाह घट गया है, ऐसे में फैसला किया गया कि पहले तीन गेट खोले जाएं और फिर स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद और गेट खोले जा सकते हैं। उपरी तटबंधीय क्षेत्रों से जलाशय में प्रवाह अब करीब 7.8 लाख क्यूसेक है।

नराज, जोबरा और डालेघई समेत कई स्थानों पर महानदी एवं सहायक नदियां खतरे के निशान से उपर बहने के कारण बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों में घुस गया है एवं राहत तथा बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। कटक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, खुरदा और पुरी जिलों पर बाढ़ का असर पड़ा जबकि जाजपुर एवं भद्रक जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। विशेष राहत आयुक्त ने बताया कि वायुसेन के दो हेलीकॉप्टर राहत कार्य के लिए तैयार रखे गए हैं। फिलहाल नौकाओं की मदद से पूरा अभियान चल रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कल मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्य में पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एवं ओड़िशा आपदा त्वति कार्रवाई बल बचाव एवं राहत कार्य में जुटे हैं।

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