शर्मा ने जताई महिला एक्ट में सख्त बदलाव की जरूरत
नई दिल्ली : राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरमैन ममता शर्मा शुक्रवार को रिटायर हो गईं। उनका 3 साल का कार्यकाल आज समाप्त हो गया। जाते-जाते उन्होंने कई बड़े सुझाव केंद्र सरकार को दे दिए।उन्होंने कहा कि महिला एक्ट में बड़े बदलाव की जरूरत है, तभी महिला आयोग पीड़ितों को सही तरह से न्याय दिला पाएगा। इसके साथ ही देश के सभी प्रदेश महिला आयोग को केंद्रीय महिला आयोग के अधीन किया जाना चाहिए।
इससे देश और राज्यों के बीच तालमेल बनेगा और महिलाओं को जल्स से जल्द न्याय मिलेगा। वर्तमान में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्य हैं, जहां से सहयोग नहीं मिल पाता है। ममता शर्मा के साथ कुछ सदस्यों को भी कार्यकाल आज खत्म हो गया।इस मौके पर ममता शर्मा ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि महिला आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद राजनीतिक होना चाहिए। या फिर जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयं सेवी संगठन के प्रतिनिधि को मिलना चाहिए।
तभी वह गांव की पीड़ित महिलाओं को उचित न्याय दिला पाएगा। ममता शर्मा ने केंद्र सरकार के उस योजना को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार चेयरपर्सन के पद को कानूनी विशेषज्ञ को देना चाहती है।उन्होंने कहा कि रिटायर्ड जज या फिर वरिष्ठ वकील को देने से कोई फायदा होगा। लिहाजा, सरकार सोच समझ कर इस पद पर नियुक्ति करे।मीडिया से रू-ब-रू होते हुए ममता शर्मा ने कहा कि महिला आयोग को बहुत कम फंड मिलता है, यही कारण है कि वह बहुत से काम नहीं कर पाई।उन्होंने इस बाबत केंद्रीय बाल एवं महिला कल्याण मंत्री मेनका गांधी से हाल ही में मिली हैं और अपनी बात रखी हैं। केंद्रीय महिला आयोग के साथ-साथ प्रदेश के महिला आयोग को भी फंड बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
पावर दिए जाने की वकालत
शर्मा ने महिला आयोग को पावर दिए जाने की वकालत की। साथ ही कहा कि सिविल कोर्ट के अधिकार दिए जाएं, ताकि आरोपियों को नोटिस जारी कर तलब किया जा सके और आन द स्पॉट फैसला हो सके।इसके अलावा राज्यों में पुलिस रिफार्म की जरूरत है। दिल्ली-मुम्बई को छोड़ दें कि बाकी राज्यों के पुलिस कर्मचारियों की हालत ठीक नहीं है। वह जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे हुए हैं।
इसलिए वह सही समय पर महिलाओं के मामले में न्याय नहीं कर पाते हैं। ब्रिटिश जमाने के कानून अभी भी थोपे जा रहे हैं। ममता शर्मा ने कहा कि निर्भया भंड को बढ़ाने के लिए भी मेनका गांधी को पत्र लिखा गया है।
वह कहती हैं कि मेनका गांधी खुद कुछ करना चाहती हैं। वह महिलाओं के विकास पर ध्यान भी दे रही हैं। इस मौके पर आयोग की सभी सदस्य भी मौजूद रही। अगला अध्यक्ष कौन होगा अभी तक तय नहीं है और न ही किसी को जानकारी है।
इससे देश और राज्यों के बीच तालमेल बनेगा और महिलाओं को जल्स से जल्द न्याय मिलेगा। वर्तमान में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्य हैं, जहां से सहयोग नहीं मिल पाता है। ममता शर्मा के साथ कुछ सदस्यों को भी कार्यकाल आज खत्म हो गया।इस मौके पर ममता शर्मा ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि महिला आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद राजनीतिक होना चाहिए। या फिर जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयं सेवी संगठन के प्रतिनिधि को मिलना चाहिए।
तभी वह गांव की पीड़ित महिलाओं को उचित न्याय दिला पाएगा। ममता शर्मा ने केंद्र सरकार के उस योजना को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार चेयरपर्सन के पद को कानूनी विशेषज्ञ को देना चाहती है।उन्होंने कहा कि रिटायर्ड जज या फिर वरिष्ठ वकील को देने से कोई फायदा होगा। लिहाजा, सरकार सोच समझ कर इस पद पर नियुक्ति करे।मीडिया से रू-ब-रू होते हुए ममता शर्मा ने कहा कि महिला आयोग को बहुत कम फंड मिलता है, यही कारण है कि वह बहुत से काम नहीं कर पाई।उन्होंने इस बाबत केंद्रीय बाल एवं महिला कल्याण मंत्री मेनका गांधी से हाल ही में मिली हैं और अपनी बात रखी हैं। केंद्रीय महिला आयोग के साथ-साथ प्रदेश के महिला आयोग को भी फंड बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
पावर दिए जाने की वकालत
शर्मा ने महिला आयोग को पावर दिए जाने की वकालत की। साथ ही कहा कि सिविल कोर्ट के अधिकार दिए जाएं, ताकि आरोपियों को नोटिस जारी कर तलब किया जा सके और आन द स्पॉट फैसला हो सके।इसके अलावा राज्यों में पुलिस रिफार्म की जरूरत है। दिल्ली-मुम्बई को छोड़ दें कि बाकी राज्यों के पुलिस कर्मचारियों की हालत ठीक नहीं है। वह जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे हुए हैं।
इसलिए वह सही समय पर महिलाओं के मामले में न्याय नहीं कर पाते हैं। ब्रिटिश जमाने के कानून अभी भी थोपे जा रहे हैं। ममता शर्मा ने कहा कि निर्भया भंड को बढ़ाने के लिए भी मेनका गांधी को पत्र लिखा गया है।
वह कहती हैं कि मेनका गांधी खुद कुछ करना चाहती हैं। वह महिलाओं के विकास पर ध्यान भी दे रही हैं। इस मौके पर आयोग की सभी सदस्य भी मौजूद रही। अगला अध्यक्ष कौन होगा अभी तक तय नहीं है और न ही किसी को जानकारी है।

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