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गूगल ने गोपनीय सामग्री से इंटरनेट को दूषित किया: स्वर्ण सुब्बा राव

नई दिल्ली : गोपनीय क्षेत्रों को कथित तौर पर अपने मानचित्र पर पेश करने को लेकर गूगल के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज करने के बाद सीबीआई ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग की मदद ली है जिसने आरोप लगाया है कि इंटरनेट सर्च कंपनी लगातार चेतावनी के बावजूद गोपनीय सामग्री से इंटरनेट को दूषित कर रही है।

जांच जारी रहने के बीच भारत के महासर्वेक्षक स्वर्ण सुब्बा राव ने आरोप लगाया है कि गूगल ने चेतावनी दिए जाने के बाद भी गोपनीय क्षेत्रों का इंटरनेट पर उल्लेख करने पर रोक नहीं लगाई। राव ने बताया, उनकी (गूगल की) मैपाथन 2013 की कवायद के दौरान उन्होंने काफी गोपनीय सामग्री एकत्रित की और हमें जब पता चला तो हमने उनसे ऐसा नहीं करने को कहा। उन्होंने कहा कि गूगल ने इससे बचने के बजाय नक्शे पर गोपनीय क्षेत्रों का उल्लेख करके इंटरनेट को दूषित कर दिया।

राव के अनुसार, उन्होंने (गूगल ने) किसी होटल में मुझसे मिलने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन मैं दफ्तर में मुलाकात के लिए अड़ा रहा। इस मामले में भारतीय सर्वेक्षण विभाग शिकायती है जो देश की आधिकारिक मानचित्र एजेंसी है। दिल्ली पुलिस की शुरूआती जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया क्योंकि जांच अमेरिका की एक कंपनी से जुड़ी है।

गूगल ने फरवरी-मार्च 2013 में मानचित्र प्रतियोगिता आयोजित करने से पहले भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) से अनुमति नहीं ली थी। इस स्पर्धा में उसने नागरिकों से अपने पास-पड़ोस के स्थानों, खासतौर पर अस्पतालों और रेस्तरांओं से जुड़ा विवरण नक्शे पर बताने को कहा था।

मैपाथन का पता लगने के बाद सतर्क हुई एसओआई ने इंटरनेट कंपनी से उसका ब्यौरा साझा करने को कहा और पता चला कि अनेक संवेदनशील रक्षा संस्थानों की जानकारी सार्वजनिक कर दी गयी। सीबीआई ने अभी तक गूगल-इंडिया की कानूनी सलाहकार गीतांजलि दुग्गल और अन्य लोगों से पूछताछ की है।

इस बारे में पूछे जाने पर गूगल-इंडिया ने कहा, हम लगातार संबंधित अधिकारियों से संपर्क में रहते हैं और राष्ट्रीय नियमों तथा सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेते हैं। कंपनी ने कहा, हम सीबीआई की जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके भेजे गये प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दे चुके हैं। इस समय हमें इससे ज्यादा कुछ साझा नहीं करना। सीबीआई ने भारतीय महासर्वेक्षक के कार्यालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में दर्ज शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गूगल ऐसे अनेक क्षेत्रों की मैपिंग की गतिविधियों में शामिल रही है जो देश के नक्शे में नहीं थे।

गृह मंत्रालय को इस संबंध में उल्लंघनों की जानकारी देते हुए एसओआई ने कहा कि केवल उसे ही ‘निषिद्ध’ श्रेणी का सर्वेक्षण करने और मैपिंग करने का अधिकार है तथा अन्य कोई सरकारी या निजी संस्था या व्यक्ति ऐसा करने के लिए अधिकृत नहीं है। राष्ट्रीय मानचित्र नीति 2005 में भी इस बात का उल्लेख है।

सूत्रों ने बताया कि गूगल इंडिया पर एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता शुरू करने का आरोप है जिसमें लोग अन्य शहरों और राज्यों में स्थित रणनीतिक महत्व वाले संस्थानों के नक्शे और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी अमेरिकी कंपनी को दे सकते थे।

एसओआई के लिहाज से यह स्पष्ट किया गया कि कंपनी ने इस कवायद से पहले कोई अनुमति नहीं ली और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण असैन्य और सैन्य क्षेत्रों, महत्वपूर्ण बिंदुओं को सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित नक्शे या आंकड़ों में नहीं दर्शाया जा सकता।

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