मैं देश छोड़कर भागने वालों में से नहीं हूं : परवेज
इस्लामाबाद : परवेज मुशर्रफ को देश छोड़कर चले जाने देने के लिए पाकिस्तान सरकार पर पड़ रहे दबाव की खबरों के बीच पूर्व सैन्य शासक ने आज कहा कि वह नहीं भागेंगे और सभी मामलों में अपना बचाव करेंगे।
70 वर्षीय पूर्व सैन्य शासक ने यहां अपनी पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सम्मेलन में समर्थकों को टेलीफोन पर संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं पाकिस्तान छोड़कर नहीं भाग रहा हूं। बल्कि, मैं अदालत में सभी मामलों में अपना बचाव करूंगा।’ हालांकि उन्होंने साफ किया कि उन्हें अपनी बीमार मां को देखने दुबई जाने की जरूरत है लेकिन वह लौटेंगे। सरकार ने अब तक उन्हें विदेश यात्रा पर जाने नहीं दिया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी मामलों को राजनीति से प्रेरित एवं बेबुनियाद करार दिया।
उन्होंने आर्थिक कुप्रबंधन को लेकर भी सराकर की आलोचना की और कहा कि जब वर्ष 2008 में उन्होंने इस्तीफा दिया था तब देश के पास 18 अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार था जबकि अभी सिर्फ चार अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब महज कुछ समय पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक करीबी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार मुशर्रफ को देश छोड़कर चले जाने देने के लिए दबाव में हैं।
सीनेट में सदन के नेता रजा जफरूल हक ने रावलपिंडी में मीडिया से कहा, ‘सरकार पर जनरल मुशर्रफ को देश छोड़कर चले जाने देने के लिए दबाव है।’ हालांकि उन्होंने दबाव डालने वाली ताकतों या व्यक्तियों का नाम नहीं बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि प्रभावशाली सेना 70 वर्षीय मुशर्रफ के विरूद्ध राजद्रोह का मामला चलाने से खुश नहीं है। तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण वर्ष 2007 में आपातकाल लगाने को लेकर पूर्व सैन्य शासक पर सुनवाई कर रहा है। मुशर्रफ के इस कृत्य (आपातकाल लगाए जाने) को राजद्रोह माना गया है और उसके लिए मृत्युदंड या उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। मुशर्रफ ने 1999 में रक्तहीन तख्तापलट कर शरीफ को अपदस्थ कर दिया था और सालभर बाद उन्हें सउदी अरब निर्वासित कर दिया था। उन्होंने 1999-2008 तक देश पर शासन किया।
हक ने कहा, ‘छिपी हुई ताकतें, जो मुशर्रफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के पक्ष में नहीं है, उनके लिए सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता चाहती है और वे प्रधानमंत्री पर दबाव डाल रही हैं।’ मुशर्रफ पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान क्षेत्र के पूर्व मुख्यमंत्री नवाब अकबर बुगती और लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद गाजी की हत्या के मामलों में भी अदालती सुनवाई का सामना कर रहे हैं।
70 वर्षीय पूर्व सैन्य शासक ने यहां अपनी पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सम्मेलन में समर्थकों को टेलीफोन पर संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं पाकिस्तान छोड़कर नहीं भाग रहा हूं। बल्कि, मैं अदालत में सभी मामलों में अपना बचाव करूंगा।’ हालांकि उन्होंने साफ किया कि उन्हें अपनी बीमार मां को देखने दुबई जाने की जरूरत है लेकिन वह लौटेंगे। सरकार ने अब तक उन्हें विदेश यात्रा पर जाने नहीं दिया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी मामलों को राजनीति से प्रेरित एवं बेबुनियाद करार दिया।
उन्होंने आर्थिक कुप्रबंधन को लेकर भी सराकर की आलोचना की और कहा कि जब वर्ष 2008 में उन्होंने इस्तीफा दिया था तब देश के पास 18 अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार था जबकि अभी सिर्फ चार अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब महज कुछ समय पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक करीबी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार मुशर्रफ को देश छोड़कर चले जाने देने के लिए दबाव में हैं।
सीनेट में सदन के नेता रजा जफरूल हक ने रावलपिंडी में मीडिया से कहा, ‘सरकार पर जनरल मुशर्रफ को देश छोड़कर चले जाने देने के लिए दबाव है।’ हालांकि उन्होंने दबाव डालने वाली ताकतों या व्यक्तियों का नाम नहीं बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि प्रभावशाली सेना 70 वर्षीय मुशर्रफ के विरूद्ध राजद्रोह का मामला चलाने से खुश नहीं है। तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण वर्ष 2007 में आपातकाल लगाने को लेकर पूर्व सैन्य शासक पर सुनवाई कर रहा है। मुशर्रफ के इस कृत्य (आपातकाल लगाए जाने) को राजद्रोह माना गया है और उसके लिए मृत्युदंड या उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। मुशर्रफ ने 1999 में रक्तहीन तख्तापलट कर शरीफ को अपदस्थ कर दिया था और सालभर बाद उन्हें सउदी अरब निर्वासित कर दिया था। उन्होंने 1999-2008 तक देश पर शासन किया।
हक ने कहा, ‘छिपी हुई ताकतें, जो मुशर्रफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के पक्ष में नहीं है, उनके लिए सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता चाहती है और वे प्रधानमंत्री पर दबाव डाल रही हैं।’ मुशर्रफ पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान क्षेत्र के पूर्व मुख्यमंत्री नवाब अकबर बुगती और लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद गाजी की हत्या के मामलों में भी अदालती सुनवाई का सामना कर रहे हैं।

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