CM शिवराज को झेलना पड़ा DPS हादसे में बेटी खो चुकी मां का गुस्सा, पूछा- जानते हैं औलाद जाने का दुख क्या होता है.. …
इंदौर । आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने उन मां का गुस्सा फट पड़ा, जिन्होंने स्कूल बस हादसे में अपने कलेजे के टुकड़े को खो दिया। भींगी आंखों और कांपती आवाज में मां ने शिवराज को चेतावनी भी दे दी, अगर ये डीपीएस स्कूल बंद नहीं हुआ ना, तो देख लेना आप।
आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर में हरमीत के घर पहुंचे थे। हरमीत वो बेटी थी, जिसकी मौत डीपीएस के स्कूल बस हादसे में हो गयी थी। हरमीत को उसकी मां ने बहुत लाजों से पाला था.. एक खरोंच लगता उसे तो वो सर पर आसमान उठा लेती थी.. 22 साल की मन्नत के बाद पैदा हुई थी हरमित !…जो उस दिन मां को बाय करते हुए ये कहकर स्कूल गयी थी.. कि जल्दी लौटेगी तो उसे बाजार ले जाना..। मां राह ताकती रही…लेकिन हरमित खुद नहीं उसकी लाश घर आयी।
आज शिवराज के सामने हरमीत कौर की मां फट पड़ी। बोली-
‘जानते हैं आप औलाद जाने का दुख क्या होता है.. नहीं जानते …आपके अफसर हंस रहे थे, जिस दिन मेरी बेटी मरी.. बोल रहे थे हादसे तो होते रहते हैं…उनके घर की बेटी नहीं मरी थी ना.. कैसे पता होता दुख क्या होता … कितने सालों बाद पैदा किया था उसे आपको मालूम नहीं है’
आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर में हरमीत के घर पहुंचे थे। हरमीत वो बेटी थी, जिसकी मौत डीपीएस के स्कूल बस हादसे में हो गयी थी। हरमीत को उसकी मां ने बहुत लाजों से पाला था.. एक खरोंच लगता उसे तो वो सर पर आसमान उठा लेती थी.. 22 साल की मन्नत के बाद पैदा हुई थी हरमित !…जो उस दिन मां को बाय करते हुए ये कहकर स्कूल गयी थी.. कि जल्दी लौटेगी तो उसे बाजार ले जाना..। मां राह ताकती रही…लेकिन हरमित खुद नहीं उसकी लाश घर आयी।
आज शिवराज के सामने हरमीत कौर की मां फट पड़ी। बोली-
‘जानते हैं आप औलाद जाने का दुख क्या होता है.. नहीं जानते …आपके अफसर हंस रहे थे, जिस दिन मेरी बेटी मरी.. बोल रहे थे हादसे तो होते रहते हैं…उनके घर की बेटी नहीं मरी थी ना.. कैसे पता होता दुख क्या होता … कितने सालों बाद पैदा किया था उसे आपको मालूम नहीं है’
रविवार दोपहर करीब 12 बजे सीएम शिवराज सिंह चौहान मृत चारों बच्चों के परिजनों से मिलने पहुंचे। श्रुति के परिजनों से मिलने के बाद सीएम जब मासूम हरमीत के परिजनों से मिलने पहुंचे तो सीएम को यहां उनके गुस्से का सामना करना पड़ा। हरमीत की मां ने सीएम से पूरे मामले को लेकर कई सवाल किए और जमकर बिफरीं। श्रद्धांजली के दौरान मां ने फोटो को उठाते हुए कहा कि नहीं करवानी इनसे श्रद्धांजली। सीएम ने उन्हें सांत्वना दी तो वे बिखल पड़ीं।
हरमीत की मां बोली-दिल्ली पब्लिक स्कूल केवल फीस लेती है, टीचर्स की कोई जिम्मेदारी नहीं है… ये स्कूल बंद होना चाहिए..मैंने उस दिन फोन किया, तो किसी ने उठाया और बोला, कि बस का एक्सीडेंट हो गया है, बच्चे अस्पताल में भर्ती है… यहां के टीचर रिस्पांसबल नहीं है, ये स्कूल बंद होना चाहिये
ऑटो वाले 10 बच्चे बैठाते हैं, ट्रैफिक वाले रोड पर बसें तेजी से चलती हैं। मुख्यमंत्री ने परिवार को ढांढस बंधाया, कहा चारों परिवार का एक उठावना बैठक करवाएं, जहां पूरा इंदौर श्रद्धांजलि देना चाहता है। परिजनों ने कहा कि प्रिंसिपल और स्कूल किसी लायक नहीं है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने इंदौर आरटीओ एमपी सिंह को हटाने के दिए निर्देश दिए। उन्होंने हादसे की मजिस्ट्रीय जांच के आदेश भी दिए। इसके पहले वे मृत बच्चों के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे। इस दौरान आक्रोशित परिजनों ने स्कूल पर अभी तक कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। इस दौरान सीएम के साथ महापौर मालिनी गौड और आईडीए अध्यक्ष शंकर लालवानी भी थे। सीएम के हादसे के तीन दिन बाद पहुंचने पर परिजन अाक्रोशित नजर आए, उन्होंने सीएम से कहा कि अभी तक स्कूल पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके बाद सीएम घायल बच्चों से मिलने बॉम्बे हॉस्टिपल गए। सीएम ने अस्पताल से निकलने के बाद कहा कि दुर्घटना की न्यायिक जांच एक आईएएस स्तर के अधिकारी से करवाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट 15 दिन के अंदर आ जाएगी। इसके बाद जो तथ्य सामने आएंगे दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 15 साल से पुरानी बसें स्कूल बसों के रूप में इस्तेमाल नहीं होगी।
इसके साथ ही फिटनेस के लिए ऑटोमेटिक सिस्टम बनाया जाएगा, जिसमें कोई छेड़छाड़ न कर सके। बसों में लगे जीपीसी से उनकी गति पता लगाने की तैयारी की जा रही है। सीएम ने कहा कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी आरटीओ का व्यवहार ठीक नहीं था, इसलिए मैंने उन्हें हटाने का निर्णय लिया।
हरमीत की मां बोली-दिल्ली पब्लिक स्कूल केवल फीस लेती है, टीचर्स की कोई जिम्मेदारी नहीं है… ये स्कूल बंद होना चाहिए..मैंने उस दिन फोन किया, तो किसी ने उठाया और बोला, कि बस का एक्सीडेंट हो गया है, बच्चे अस्पताल में भर्ती है… यहां के टीचर रिस्पांसबल नहीं है, ये स्कूल बंद होना चाहिये
ऑटो वाले 10 बच्चे बैठाते हैं, ट्रैफिक वाले रोड पर बसें तेजी से चलती हैं। मुख्यमंत्री ने परिवार को ढांढस बंधाया, कहा चारों परिवार का एक उठावना बैठक करवाएं, जहां पूरा इंदौर श्रद्धांजलि देना चाहता है। परिजनों ने कहा कि प्रिंसिपल और स्कूल किसी लायक नहीं है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने इंदौर आरटीओ एमपी सिंह को हटाने के दिए निर्देश दिए। उन्होंने हादसे की मजिस्ट्रीय जांच के आदेश भी दिए। इसके पहले वे मृत बच्चों के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे। इस दौरान आक्रोशित परिजनों ने स्कूल पर अभी तक कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। इस दौरान सीएम के साथ महापौर मालिनी गौड और आईडीए अध्यक्ष शंकर लालवानी भी थे। सीएम के हादसे के तीन दिन बाद पहुंचने पर परिजन अाक्रोशित नजर आए, उन्होंने सीएम से कहा कि अभी तक स्कूल पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके बाद सीएम घायल बच्चों से मिलने बॉम्बे हॉस्टिपल गए। सीएम ने अस्पताल से निकलने के बाद कहा कि दुर्घटना की न्यायिक जांच एक आईएएस स्तर के अधिकारी से करवाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट 15 दिन के अंदर आ जाएगी। इसके बाद जो तथ्य सामने आएंगे दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 15 साल से पुरानी बसें स्कूल बसों के रूप में इस्तेमाल नहीं होगी।
इसके साथ ही फिटनेस के लिए ऑटोमेटिक सिस्टम बनाया जाएगा, जिसमें कोई छेड़छाड़ न कर सके। बसों में लगे जीपीसी से उनकी गति पता लगाने की तैयारी की जा रही है। सीएम ने कहा कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी आरटीओ का व्यवहार ठीक नहीं था, इसलिए मैंने उन्हें हटाने का निर्णय लिया।
सम्भार : www.newpowergame.com

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